नील नदी विवाद में ट्रम्प की एंट्री: मिस्र–इथियोपिया के बीच जल बंटवारे पर मध्यस्थता दोबारा शुरू करने की पेशकश

SHARE:

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने नील नदी के पानी को लेकर मिस्र और इथियोपिया के बीच चल रहे लंबे विवाद में एक बार फिर हस्तक्षेप की इच्छा जताई है। ट्रम्प ने मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी को एक पत्र लिखकर कहा है कि अमेरिका इस संवेदनशील मुद्दे पर दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की प्रक्रिया दोबारा शुरू करने के लिए तैयार है। यह पत्र ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर भी साझा किया है, जिससे यह साफ हो गया है कि अमेरिका इस विवाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फिर से चर्चा के केंद्र में लाना चाहता है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रम्प ने अपने पत्र में लिखा है कि नील नदी के जल बंटवारे का मुद्दा जिम्मेदारी और स्थायित्व के साथ सुलझाया जाना चाहिए, ताकि क्षेत्र में दीर्घकालिक स्थिरता बनी रहे। ट्रम्प का कहना है कि अमेरिका इस प्रक्रिया में निष्पक्ष भूमिका निभाते हुए दोनों देशों को किसी समझौते तक पहुंचाने में मदद कर सकता है।

5 अरब डॉलर का डैम बना विवाद की जड़

मिस्र और इथियोपिया के बीच तनाव की सबसे बड़ी वजह इथियोपिया की ग्रैंड इथियोपियन रिनेसां डैम परियोजना है, जिसे GERD के नाम से जाना जाता है। करीब 5 अरब डॉलर की लागत से यह विशाल बांध नील नदी की सहायक ब्लू नील पर बनाया गया है। इथियोपिया ने 9 सितंबर 2025 को इस बांध का आधिकारिक उद्घाटन किया था, जिसके बाद से मिस्र में तीखी नाराजगी देखने को मिल रही है।

इथियोपिया इस परियोजना को अपनी आर्थिक तरक्की और ऊर्जा जरूरतों के लिए बेहद जरूरी मानता है। 12 करोड़ से ज्यादा आबादी वाले इस देश के लिए GERD को विकास की रीढ़ माना जा रहा है। दूसरी ओर, मिस्र का आरोप है कि यह बांध अंतरराष्ट्रीय जल समझौतों का उल्लंघन करता है और इससे देश में पानी की भारी कमी, सूखे और बाढ़ जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। हालांकि, इथियोपिया लगातार इन आशंकाओं को खारिज करता रहा है।

ट्रम्प के पहले कार्यकाल में भी हुई थी मध्यस्थता

यह पहली बार नहीं है जब डोनाल्ड ट्रम्प इस विवाद में मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं। 2019 के अंत से लेकर फरवरी 2020 की शुरुआत तक अमेरिका ने मिस्र और इथियोपिया के बीच औपचारिक बातचीत कराई थी। उस समय यह प्रक्रिया अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट और वर्ल्ड बैंक की मौजूदगी में वॉशिंगटन में चली थी।

फरवरी 2020 में अमेरिका ने एक ड्राफ्ट एग्रीमेंट भी तैयार कराया था। मिस्र ने इस मसौदे को स्वीकार कर लिया था, लेकिन इथियोपिया ने इस पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। इसके बाद मध्यस्थता की प्रक्रिया ठप पड़ गई। उसी साल ट्रम्प ने सार्वजनिक तौर पर मिस्र के पक्ष में बयान दिए थे, जिससे इथियोपिया ने अमेरिका की निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे।

मिस्र के लिए नील नदी क्यों है अस्तित्व का सवाल

नील नदी मिस्र के लिए सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि देश की जीवनरेखा है। रेगिस्तानी भौगोलिक स्थिति वाले मिस्र में पीने का पानी, खेती, उद्योग और बिजली उत्पादन लगभग पूरी तरह नील नदी पर निर्भर है। यही वजह है कि नील से जुड़ा हर मसला मिस्र के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय बन जाता है।

मिस्र की करीब 11 करोड़ आबादी की 90 से 95 प्रतिशत पानी की जरूरतें नील नदी से पूरी होती हैं। देश का लगभग 90 प्रतिशत इलाका रेगिस्तान है, जहां प्राकृतिक वर्षा न के बराबर होती है। ऐसे में नील ही एकमात्र स्थायी जल स्रोत है। खेती के लिहाज से भी नील की भूमिका अहम है, क्योंकि मिस्र की करीब 95 प्रतिशत कृषि भूमि नील नदी और उसके डेल्टा क्षेत्र में स्थित है।

पहले से जल संकट से जूझ रहा मिस्र

मिस्र पहले से ही गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है। 1959 के जल समझौते के तहत मिस्र को हर साल नील से 55.5 अरब क्यूबिक मीटर पानी मिलने का प्रावधान है। उस समय देश की आबादी काफी कम थी, लेकिन आज हालात बदल चुके हैं। वर्तमान में मिस्र में प्रति व्यक्ति सालाना जल उपलब्धता 600 क्यूबिक मीटर से भी नीचे आ चुकी है, जबकि संयुक्त राष्ट्र के मानकों के अनुसार 1,000 क्यूबिक मीटर से कम उपलब्धता को जल संकट की स्थिति माना जाता है।

नील नदी का असर सिर्फ गांव और खेतों तक सीमित नहीं है। काहिरा और अलेक्जेंड्रिया जैसे बड़े शहरों की जल आपूर्ति भी इसी नदी पर निर्भर है। इसके अलावा असवान हाई डैम से मिलने वाली जलविद्युत भी नील से जुड़ी हुई है, जो मिस्र की ऊर्जा जरूरतों में अहम योगदान देती है।

इन्हीं कारणों से मिस्र सरकार नील नदी से जुड़े हर घटनाक्रम को बेहद संवेदनशील मानती है। जल प्रवाह में अनिश्चितता या लंबे समय तक पानी रोके जाने की आशंका को मिस्र सीधे तौर पर अपने अस्तित्व और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा खतरा मानता है। ऐसे में ट्रम्प की मध्यस्थता की पेशकश आने वाले समय में इस क्षेत्रीय विवाद को नई दिशा दे सकती है।

THE CG NEWS
Author: THE CG NEWS

TheCGNews.in – छत्तीसगढ़ की सच्ची आवाज़ “TheCGNews.in” छत्तीसगढ़ का एक उभरता हुआ डिजिटल न्यूज़ पोर्टल है, जो प्रदेश की ज़मीन से जुड़ी, वास्तविक और निष्पक्ष खबरें लोगों तक पहुँचाने के मिशन के साथ कार्यरत है। इस पोर्टल की सबसे बड़ी ताकत है – स्थानीयता और विश्वसनीयता। TheCGNews.in का फोकस सिर्फ ब्रेकिंग न्यूज पर नहीं, बल्कि उन खबरों पर है जो आम लोगों के जीवन को प्रभावित करती हैं – गांव, कस्बों, पंचायत, युवाओं, शिक्षा, रोजगार, राजनीति, संस्कृति और जन-समस्याओं की सच्ची झलक यहाँ देखने को मिलती है। TheCGNews.in की खास बातें: • ✅ छत्तीसगढ़ की हर कोने से रिपोर्टिंग • ✅ सिर्फ सनसनी नहीं – समाधान की पत्रकारिता • ✅ युवाओं और किसानों की आवाज़ • ✅ भ्रष्टाचार, विकास और बदलाव की असली रिपोर्ट • ✅ हिंदी में सरल और स्पष्ट भाषा में खबरें

Leave a Comment

सबसे ज्यादा पड़ गई