
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान-इजराइल संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। इसी बीच भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने के लिए रूस से करीब 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल खरीदने का फैसला किया है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक यह खरीदारी भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों द्वारा की गई है, जिसमें इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल हैं। यह कदम उस समय उठाया गया है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते तेल सप्लाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय कंपनियों ने उन रूसी तेल टैंकरों को खरीद लिया है जो पहले से एशियाई समुद्री क्षेत्र में मौजूद थे और खरीदारों का इंतजार कर रहे थे। मिडिल ईस्ट में अस्थिर हालात के बीच भारत ने तुरंत निर्णय लेते हुए इस उपलब्ध तेल को सुरक्षित कर लिया ताकि देश में कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित न हो।
IOC और रिलायंस ने की बड़ी खरीद
सूत्रों के अनुसार इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने लगभग 1 करोड़ बैरल कच्चा तेल खरीदा है, जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज ने भी कम से कम 1 करोड़ बैरल तेल की बुकिंग की है। बाकी बची मात्रा अन्य भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों ने खरीदी है। इस तरह कुल मिलाकर करीब 3 करोड़ बैरल तेल रूस से खरीदा गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की रिफाइनिंग कंपनियों ने इस अवसर का फायदा उठाते हुए उन जहाजों से तेल खरीद लिया जो पहले से समुद्र में मौजूद थे। इससे सप्लाई की अनिश्चितता के बीच भारत को तुरंत अतिरिक्त तेल उपलब्ध हो गया।
समुद्र में खड़े टैंकरों का रुख भारत की ओर
शिपिंग डेटा के अनुसार रूस से तेल लेकर आ रहे कई बड़े टैंकर पहले सिंगापुर और अन्य एशियाई बाजारों की ओर जा रहे थे। लेकिन हालात बदलने के बाद इन जहाजों ने अपना रास्ता बदलकर भारत के बंदरगाहों की ओर रुख कर लिया। ‘मायलो’ और ‘सारा’ जैसे टैंकरों के गंतव्य में बदलाव दर्ज किया गया है।
बताया जा रहा है कि रूस ने भारत को यूराल्स, ESPO और वरान्डे जैसे कच्चे तेल के अलग-अलग ग्रेड उपलब्ध कराए हैं। भारतीय रिफाइनरियों के लिए ये ग्रेड उपयुक्त माने जाते हैं, इसलिए कंपनियों ने तेजी से इनकी खरीद का फैसला किया।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर तनाव का असर
ईरान और इजराइल के बीच जारी संघर्ष के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास तनाव बढ़ गया है। यह समुद्री मार्ग दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल सप्लाई के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। भारत भी अपनी बड़ी मात्रा में तेल इसी रास्ते से मंगाता रहा है। भारत अपनी जरूरत का करीब 50 प्रतिशत कच्चा तेल और 54 प्रतिशत एलएनजी इसी मार्ग से प्राप्त करता है।
हालांकि मौजूदा हालात को देखते हुए भारत ने अपनी ऊर्जा आयात रणनीति में बदलाव करना शुरू कर दिया है। अब देश ने उन वैकल्पिक मार्गों और सप्लायर देशों पर ज्यादा ध्यान देना शुरू कर दिया है जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते पर निर्भर नहीं हैं।
ऊर्जा आयात के नए विकल्प तलाश रहा भारत
ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भारत ने वैकल्पिक समुद्री मार्गों से कच्चे तेल के आयात में लगभग 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। पहले भारत अपनी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत तेल ऐसे रास्तों से लाता था जो होर्मुज के बाहर आते हैं, लेकिन अब इसे बढ़ाकर करीब 70 प्रतिशत कर दिया गया है।
इस रणनीति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि मिडिल ईस्ट में संघर्ष लंबा खिंचता है तो भी भारत की ऊर्जा आपूर्ति बाधित न हो। भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का करीब 85 से 90 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है, जो 40 से अधिक देशों से आता है।
भारत के पास पर्याप्त तेल भंडार
सरकारी अधिकारियों के अनुसार वर्तमान स्थिति में भारत के पास कच्चे तेल और एलएनजी का पर्याप्त भंडार मौजूद है। हाल ही में हुई आंतरिक समीक्षा बैठकों में यह सामने आया है कि देश की ऊर्जा स्टॉक स्थिति पहले की तुलना में बेहतर हुई है। इससे सरकार और ऊर्जा कंपनियों का आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
अधिकारियों का कहना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां और बिगड़ती हैं तब भी भारत के पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद रहेगा। साथ ही कई अन्य देशों ने भी भारत को तेल और एलएनजी सप्लाई करने में रुचि दिखाई है।
ईरान ने भी दिया आश्वासन
सूत्रों के अनुसार ईरान ने संकेत दिए हैं कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास जहाजों की आवाजाही जल्द सामान्य हो सकती है। ईरान ने यह भी कहा है कि वह अपने पड़ोसी देशों को तब तक निशाना नहीं बनाएगा जब तक उनके क्षेत्र से उस पर हमला नहीं किया जाता।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह रणनीति वैश्विक ऊर्जा बाजार की अनिश्चितता के बीच देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उठाया गया एक अहम कदम है। रूस से बड़े पैमाने पर कच्चे तेल की खरीद से भारत को तत्काल राहत मिलने की उम्मीद है और इससे घरेलू ऊर्जा सप्लाई पर संकट का खतरा कम होगा।
Author: THE CG NEWS
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