5 दिन बाद कमर्शियल LPG सिलेंडर की सप्लाई फिर शुरू: सरकार ने घबराकर बुकिंग न करने की अपील की, दिल्ली-NCR के होटल-रेस्टोरेंट को कचरे से बनी गैस इस्तेमाल करने की सलाह

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देश में पिछले कुछ दिनों से चल रही एलपीजी सिलेंडर की किल्लत के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए कमर्शियल LPG सिलेंडर की सप्लाई फिर से शुरू कर दी है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने जानकारी दी कि पांच दिन पहले लगाई गई रोक को हटा दिया गया है और अब देश के 29 राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में कमर्शियल गैस सिलेंडरों का वितरण फिर से शुरू हो गया है। मंत्रालय के मुताबिक यह कदम बाजार में गैस की उपलब्धता को संतुलित करने और जमाखोरी पर नियंत्रण पाने के लिए उठाया गया था। सरकार ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे घबराकर गैस की बुकिंग न करें, क्योंकि सप्लाई को धीरे-धीरे सामान्य किया जा रहा है।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने 9 मार्च को कमर्शियल LPG सिलेंडर की सप्लाई पर अस्थायी रोक लगाई थी। इसका उद्देश्य घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करना और कालाबाजारी को रोकना था। इस दौरान देश के कई हिस्सों में गैस की कमी की खबरें सामने आई थीं, जिससे होटल-रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

कालाबाजारी और अवैध भंडारण के खिलाफ सख्त कार्रवाई

सरकार ने सिलेंडरों की कालाबाजारी और अवैध भंडारण पर सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। विभिन्न राज्यों में गैस एजेंसियों और गोदामों पर लगातार छापेमारी की जा रही है। उत्तर प्रदेश में करीब 1400 जगहों पर औचक जांच की गई, जिसमें 20 एफआईआर दर्ज की गईं और 19 लोगों को गिरफ्तार किया गया। वहीं तेल विपणन कंपनियों ने भी देशभर में अपने 1300 से अधिक डिस्ट्रीब्यूटर्स की जांच की है।

कर्नाटक में खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग ने कार्रवाई करते हुए 316 घरेलू गैस सिलेंडर जब्त किए, जिनका इस्तेमाल अवैध रूप से कमर्शियल कामों में किया जा रहा था। बेंगलुरु, दावणगेरे और अन्य शहरों में भी ऐसी कई शिकायतें सामने आई हैं, जहां घरेलू सिलेंडर का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों में किया जा रहा था।

दिल्ली-NCR में वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल की अनुमति

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि दिल्ली-NCR क्षेत्र में उद्योगों, होटलों और रेस्टोरेंट्स को अस्थायी तौर पर वैकल्पिक ईंधन के उपयोग की अनुमति दी गई है। एक महीने तक नेचुरल गैस के स्थान पर बायोमास से बने पेलेट्स, विशेष रूप से रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल (RDF) पेलेट्स के इस्तेमाल की मंजूरी दी गई है।

यह फैसला वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के निर्देशों के बाद लिया गया है। RDF दरअसल कचरे से तैयार किया जाने वाला ईंधन है। इसमें नगर निगम और उद्योगों से निकलने वाले सूखे कचरे जैसे प्लास्टिक, कागज, कपड़े और लकड़ी को प्रोसेस कर छोटे-छोटे पेलेट्स में बदल दिया जाता है। इसका उपयोग कोयले या नेचुरल गैस के विकल्प के रूप में बिजली उत्पादन और औद्योगिक इकाइयों में किया जाता है, जिससे कचरे का बेहतर प्रबंधन होता है और प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलती है।

गैस संकट का असर कई राज्यों में दिखा

देश के कई राज्यों में एलपीजी की कमी का असर स्पष्ट रूप से देखने को मिला है। छत्तीसगढ़ के रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई और रायगढ़ जैसे शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लोगों की लंबी कतारें देखी गईं। कुछ जगहों पर सर्वर ठप होने की वजह से लोगों की परेशानी और बढ़ गई। कमर्शियल गैस की कमी के कारण कई होटलों में खाने की कीमतों पर 10 प्रतिशत तक सरचार्ज लगाया गया है। कुछ जिलों में होटल और ढाबे लकड़ी के चूल्हों पर खाना बनाने को मजबूर हो गए हैं।

मध्य प्रदेश के कई शहरों में भी गैस सिलेंडर लेने के लिए लोगों को घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ा। छिंदवाड़ा में गैस गोदामों के बाहर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस की तैनाती करनी पड़ी। बिहार, राजस्थान और पंजाब में भी गैस एजेंसियों के बाहर लंबी लाइनों की खबरें सामने आईं।

सिलेंडर लेने की लाइन में बुजुर्गों की मौत की घटनाएं

गैस संकट के दौरान कुछ दुखद घटनाएं भी सामने आईं। उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में गैस एजेंसी के बाहर लाइन में लगे एक 76 वर्षीय बुजुर्ग की तबीयत अचानक बिगड़ गई और अस्पताल ले जाने से पहले ही उनकी मौत हो गई। इसी तरह पंजाब के बरनाला में भी सिलेंडर लेने के लिए लगी लाइन में खड़े एक बुजुर्ग की हार्ट अटैक से मौत हो गई।

विदेश से आ रहे LPG जहाजों से मिलेगी राहत

सरकार के अनुसार खाड़ी देशों से एलपीजी लेकर आ रहे दो भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज रूट पार कर चुके हैं और गुजरात के मुंद्रा तथा कांडला बंदरगाह की ओर बढ़ रहे हैं। इन जहाजों में करीब 92,700 टन एलपीजी लदी हुई है, जो 16 या 17 मार्च तक भारत पहुंच सकती है। माना जा रहा है कि इन जहाजों के पहुंचने के बाद गैस की किल्लत काफी हद तक कम हो जाएगी और बाजार में सप्लाई सामान्य होने लगेगी।

सरकार का कहना है कि आने वाले दिनों में एलपीजी वितरण व्यवस्था को पूरी तरह सामान्य करने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त आपूर्ति भी सुनिश्चित की जाएगी।

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Author: THE CG NEWS

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