
इजराइल के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले इलाकों में शामिल डिमोना शहर शनिवार रात अचानक हमले का केंद्र बन गया, जब ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलें देश की मजबूत मानी जाने वाली एयर डिफेंस प्रणाली को भेदते हुए रिहायशी इलाकों तक पहुंच गईं। नेगेव रेगिस्तान में स्थित डिमोना न्यूक्लियर फैसिलिटी, जिसे शिमोन पेरेस नेगेव परमाणु अनुसंधान केंद्र भी कहा जाता है, लंबे समय से इजराइल की सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा माना जाता रहा है। यहां बहुस्तरीय मिसाइल रक्षा प्रणाली तैनात है, इसके बावजूद यह हमला सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
तीन घंटे के अंतर में दो हमले, 1500 किमी का सफर तय कर पहुंचीं मिसाइलें
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान की दो बैलिस्टिक मिसाइलों ने करीब 1500 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए डिमोना और पास के अराद शहर को निशाना बनाया। दोनों हमलों के बीच लगभग तीन घंटे का अंतर था। मिसाइलों ने इजराइल की एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम—आयरन डोम, डेविड्स स्लिंग, एरो-3 और अमेरिकी THAAD—को चकमा देते हुए अपने लक्ष्य के करीब पहुंचकर विस्फोट किया। हमले में करीब 175 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। रिहायशी इलाकों में भारी नुकसान दर्ज किया गया है, हालांकि समय पर लोगों के बंकर में पहुंच जाने से किसी की मौत नहीं हुई।
इजराइल ने मानी चूक, जांच शुरू
इस हमले के बाद इजराइली सेना ने स्वीकार किया है कि उसने मिसाइलों को रोकने की कोशिश की थी, लेकिन वह सफल नहीं हो सकी। यह स्वीकारोक्ति इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि इजराइल की रक्षा प्रणाली दुनिया की सबसे उन्नत मानी जाती है। डिमोना जैसे संवेदनशील इलाके में इस तरह की चूक ने न केवल सुरक्षा तंत्र बल्कि खुफिया तंत्र पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल यह जांच की जा रही है कि आखिर किस स्तर पर चूक हुई और मिसाइलें इतनी गहराई तक कैसे पहुंच गईं।
मजबूत डिफेंस सिस्टम के बावजूद कैसे हुआ हमला
इजराइल की मल्टी-लेयर एयर डिफेंस प्रणाली को दुनिया में सबसे प्रभावी माना जाता है। आयरन डोम छोटे रॉकेट्स को रोकने में सक्षम है, जबकि डेविड्स स्लिंग मध्यम दूरी की मिसाइलों के लिए इस्तेमाल होता है। एरो-3 सिस्टम लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को अंतरिक्ष के करीब ही नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसके अलावा अमेरिकी THAAD सिस्टम भी इजराइल की सुरक्षा में तैनात है। इसके बावजूद इन सभी सिस्टम्स का एक साथ फेल होना कई तकनीकी और रणनीतिक सवाल खड़े कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल तकनीकी विफलता नहीं बल्कि ऑपरेशनल स्तर पर भी चूक हो सकती है। यानी सिस्टम मौजूद थे, लेकिन उन्हें सही समय और तरीके से इस्तेमाल नहीं किया जा सका। इसके अलावा बैलिस्टिक मिसाइलों की गति, दिशा बदलने की क्षमता और हवा में विभाजित होकर कई हिस्सों में टूटने की तकनीक उन्हें रोकना और भी कठिन बना देती है।
इंटरसेप्टर मिसाइलों के स्टॉक पर भी उठे सवाल
एक और बड़ा मुद्दा इंटरसेप्टर मिसाइलों के स्टॉक को लेकर सामने आ रहा है। पिछले साल ईरान के साथ 12 दिन के संघर्ष में इजराइल ने बड़ी संख्या में इंटरसेप्टर मिसाइलों का इस्तेमाल किया था। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि कहीं इजराइल अपने महंगे इंटरसेप्टर को बचाने की रणनीति तो नहीं अपना रहा। हालांकि इजराइली सेना ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि उसके पास पर्याप्त संसाधन हैं और वह लंबी लड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार है।
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस घटना को ‘चमत्कार’ बताया, क्योंकि इतने बड़े हमले के बावजूद कोई जनहानि नहीं हुई। उन्होंने नागरिकों से सतर्क रहने और अलर्ट मिलते ही तुरंत बंकर में जाने की अपील की है।
पूर्ण सुरक्षा की गारंटी नहीं, बढ़ सकता है खतरा
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कोई भी डिफेंस सिस्टम पूरी तरह फुल-प्रूफ नहीं होता। आधुनिक युद्ध में तकनीक के बावजूद जोखिम बना रहता है। यदि इजराइल और ईरान के बीच यह संघर्ष लंबा चलता है, तो संसाधनों और रणनीति दोनों पर दबाव बढ़ना तय है। डिमोना पर हुआ यह हमला न केवल इजराइल बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक चेतावनी है कि सुरक्षा के सबसे मजबूत दावे भी वास्तविक युद्ध की परिस्थितियों में चुनौती के घेरे में आ सकते हैं।
Author: THE CG NEWS
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