बस्तर में नक्सलवाद को बड़ा झटका: आखिरी बड़े कैडर पापाराव ने साथियों संग किया सरेंडर, AK-47 के साथ पहुंचा थाने

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छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान को एक बड़ी सफलता मिली है। नक्सल मुक्त बस्तर घोषित करने की तय डेडलाइन से महज कुछ दिन पहले ही क्षेत्र के आखिरी बड़े और सक्रिय नक्सली पापाराव उर्फ मंगू ने अपने साथियों के साथ सरेंडर कर दिया। पापाराव का इस तरह हथियारों सहित सामने आना सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक निर्णायक उपलब्धि माना जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, वह AK-47 राइफल समेत अन्य हथियार लेकर बीजापुर जिले के कुटरू थाने पहुंचा और आत्मसमर्पण कर दिया।

संगठन में अहम भूमिका निभा रहा था पापाराव

56 वर्षीय पापाराव सुकमा जिले का रहने वाला है और नक्सल संगठन में लंबे समय से सक्रिय था। वह दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZCM) का सदस्य होने के साथ-साथ पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी का इंचार्ज और दक्षिण सब-जोनल ब्यूरो का भी हिस्सा था। बस्तर के घने जंगलों, पहाड़ी इलाकों और स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों की गहरी जानकारी होने के कारण वह कई बार सुरक्षा बलों की कार्रवाई से बच निकलने में सफल रहा था। यही वजह थी कि उसे संगठन का मजबूत फाइटर माना जाता था।

लगातार कमजोर होता गया नक्सली नेटवर्क

पिछले एक साल में बस्तर क्षेत्र में नक्सल संगठन को लगातार बड़े झटके लगे हैं। सुरक्षा बलों के ऑपरेशन में संगठन के कई शीर्ष नेताओं और सक्रिय कैडरों का अंत हुआ है। इनमें माड़वी हिड़मा, बसवाराजू और गणेश उइके जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इसके अलावा कई नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण भी किया है। भूपति, रूपेश और रामधेर जैसे नेताओं ने अपने सैकड़ों साथियों के साथ सरेंडर कर संगठन की कमर तोड़ दी।

इसी कड़ी में बस्तर की बटालियन नंबर 1 के कमांडर देवा का सरेंडर भी बेहद अहम माना गया था। इन घटनाओं के बाद पापाराव ही ऐसा प्रमुख और सक्रिय नक्सली बचा था, जो मैदान में लड़ाकू भूमिका निभा रहा था। उसके आत्मसमर्पण से अब पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी लगभग पूरी तरह खत्म मानी जा रही है।

बस्तर को नक्सल मुक्त घोषित करने की दिशा में बड़ा कदम

राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से बस्तर को नक्सल मुक्त घोषित करने के मिशन पर काम कर रही हैं। इसके लिए लगातार ऑपरेशन, विकास कार्यों और सरेंडर नीति को मजबूत किया गया है। पापाराव का आत्मसमर्पण इस मिशन में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अब संगठन में केवल कुछ शीर्ष स्तर के नेता ही बचे हैं, जिनमें मिशिर बेसरा और गणपति जैसे नाम शामिल हैं। हालांकि, इनकी सक्रियता भी पहले की तुलना में काफी सीमित हो चुकी है। जमीनी स्तर पर संगठन का ढांचा तेजी से कमजोर हुआ है, जिससे नक्सलवाद के पूरी तरह खत्म होने की संभावना मजबूत हो गई है।

स्थानीय लोगों के लिए राहत की खबर

पापाराव जैसे बड़े नक्सली के सरेंडर से स्थानीय लोगों में भी राहत का माहौल है। लंबे समय से नक्सल हिंसा की मार झेल रहे ग्रामीण अब शांति और विकास की उम्मीद कर रहे हैं। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे क्षेत्रों में सुधार की संभावनाएं भी अब बढ़ती नजर आ रही हैं।

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि आने वाले दिनों में बचे हुए नक्सलियों को भी सरेंडर के लिए प्रेरित किया जाएगा। साथ ही, जो लोग अब भी हिंसा का रास्ता चुनते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

अंत की ओर बढ़ता नक्सलवाद

पापाराव का सरेंडर सिर्फ एक व्यक्ति का आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि बस्तर में नक्सलवाद के अंत की ओर बढ़ता एक मजबूत संकेत है। जिस संगठन ने दशकों तक इस क्षेत्र में अपनी पकड़ बनाए रखी, वह अब बिखरता नजर आ रहा है। अगर इसी तरह अभियान जारी रहा, तो वह दिन दूर नहीं जब बस्तर पूरी तरह नक्सल मुक्त घोषित किया जा सकेगा।

THE CG NEWS
Author: THE CG NEWS

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