
जम्मू-कश्मीर की राजनीति में शुक्रवार को उस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया, जब विधानसभा के भीतर सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच तीखी नोकझोंक हाथापाई में बदल गई। मामला ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर प्रदर्शन और उसके बाद हुए राजनीतिक बयानबाजी से जुड़ा है। इस पूरे घटनाक्रम ने सदन की कार्यवाही को बाधित कर दिया और राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी।
विधानसभा में नेशनल कॉन्फ्रेंस के कुछ विधायक खामेनेई की तस्वीर लेकर पहुंचे और उनके समर्थन में नारेबाजी करने लगे। इस दौरान सदन में पोस्टर लहराए गए, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं ने इसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर अपनी संवेदनशीलता और राजनीतिक स्टैंड बताया।
राहुल गांधी पर टिप्पणी से भड़का विवाद
सदन के भीतर असली टकराव उस समय हुआ, जब कांग्रेस और भाजपा विधायकों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। कांग्रेस विधायक इरफान हाफिज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारे लगा रहे थे। इसके जवाब में भाजपा विधायक युद्धवीर सेठी ने राहुल गांधी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी।
इस टिप्पणी के बाद दोनों पक्षों के बीच माहौल अचानक गरमा गया और देखते ही देखते धक्का-मुक्की शुरू हो गई। विधानसभा के अंदर हाथापाई का वीडियो भी सामने आया, जिसने इस घटना को और गंभीर बना दिया। सुरक्षा कर्मियों को बीच-बचाव करना पड़ा, तब जाकर स्थिति नियंत्रण में आई।
सीएम उमर अब्दुल्ला का बयान
घटना के बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ईरान पर हो रहे हमलों को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ईरान पर यह युद्ध थोपा गया है और इससे मानवता को नुकसान पहुंचा है। उनके इस बयान ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है, क्योंकि विपक्ष ने इसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर राज्य सरकार के रुख के रूप में देखा है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस का ईरान समर्थन
नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक तनवीर सादिक ने स्पष्ट रूप से कहा कि उनकी पार्टी ईरान के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से खामेनेई की हत्या हुई, वह निंदनीय है और किसी भी देश को दूसरे देश पर हमला करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने केंद्र सरकार से भी इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान से जुड़े घटनाक्रमों को लेकर वैश्विक राजनीति में हलचल बनी हुई है।
कश्मीर में फंड जुटाने पर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क
इसी बीच कश्मीर घाटी में ईरान के समर्थन में बड़े स्तर पर चंदा जुटाए जाने की खबर ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। सूत्रों के अनुसार, अब तक करीब ₹18 करोड़ का फंड एकत्र किया गया है, जिसमें से लगभग 85% राशि शिया समुदाय द्वारा दी गई है।
बडगाम जैसे शिया बहुल क्षेत्रों से ही करीब ₹9.5 करोड़ की राशि जुटाई गई है। यह फंड जकात और सदका के माध्यम से एकत्र किया जा रहा है और इसे ईरान के प्रभावित नागरिकों की मदद के नाम पर बताया जा रहा है। हालांकि एजेंसियों को आशंका है कि इस राशि का इस्तेमाल कहीं गलत गतिविधियों में न हो, इसलिए इसकी निगरानी बढ़ा दी गई है।
राजनीतिक और सुरक्षा दोनों मोर्चों पर चुनौती
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में हुई इस घटना ने राज्य की राजनीति और कानून-व्यवस्था दोनों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां सदन के भीतर अनुशासन और गरिमा पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को लेकर स्थानीय राजनीति में बढ़ती संवेदनशीलता भी चिंता का विषय बनती जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में राजनीतिक दलों को संयम बरतने की जरूरत है, ताकि लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनी रहे। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने जम्मू-कश्मीर की राजनीति को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
Author: THE CG NEWS
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