
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को बड़ी सफलता मिली है। केंद्र सरकार द्वारा तय 31 मार्च की डेडलाइन के आखिरी दिन सुरक्षाबलों ने बीजापुर जिले में अब तक का सबसे बड़ा नक्सली डंप बरामद किया है। इस डंप की कुल कीमत करीब 14 करोड़ रुपए बताई जा रही है, जिसमें 3 करोड़ रुपए नकद और लगभग 7 किलोग्राम सोना शामिल है। इस कार्रवाई के साथ ही राज्य के अलग-अलग जिलों में कुल 34 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की है।
सरेंडर के बाद मिला बड़ा सुराग
पुलिस के अनुसार बीजापुर में 25 नक्सलियों ने हथियार डालकर आत्मसमर्पण किया। इन नक्सलियों से पूछताछ के बाद सुरक्षाबलों को इस बड़े डंप की जानकारी मिली, जिसके आधार पर कार्रवाई कर भारी मात्रा में कैश और सोना बरामद किया गया। अधिकारियों का कहना है कि यह अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक नेटवर्क उजागर करने वाली कार्रवाई है, जिससे नक्सलियों की फंडिंग को बड़ा झटका लगा है।
इन 25 नक्सलियों में दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) के सक्रिय सदस्य शामिल हैं, जिन पर कुल 1.47 करोड़ रुपए का इनाम घोषित था। सरेंडर करने वालों में मंगल कोरसा उर्फ मोटू, आकाश उर्फ फागु उईका, शंकर मुचाकी, राजू रैयाम उर्फ मुन्ना और पाले कुरसम जैसे बड़े नाम शामिल हैं। ये सभी कई बड़ी नक्सली घटनाओं में शामिल रहे हैं।
चार जिलों में 34 नक्सलियों ने छोड़ा हथियार
बीजापुर के अलावा दंतेवाड़ा, सुकमा और कांकेर जिलों में भी नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। दंतेवाड़ा में 5, सुकमा में 2 और कांकेर में 2 नक्सलियों ने हथियार डाले। सुकमा में सरेंडर करने वाली दो महिला नक्सलियों पर 8-8 लाख रुपए का इनाम था। इनके पास से करीब 10 लाख रुपए नकद और हथियार भी बरामद किए गए हैं।
पुलिस का कहना है कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों से मिली जानकारी के आधार पर आगे भी अभियान जारी रहेगा और छिपे हुए कैडर तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
बीजापुर में कुल बरामदगी 19 करोड़ के पार
बीजापुर जिले में पिछले दो वर्षों में नक्सलियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। 1 जनवरी 2024 से लेकर 31 मार्च 2026 तक कुल 1003 माओवादी कैडर आत्मसमर्पण कर चुके हैं। इस दौरान पहले 5.37 करोड़ रुपए की बरामदगी हुई थी, जिसमें सोना और नकदी शामिल थी। ताजा कार्रवाई के बाद जिले में कुल बरामदगी बढ़कर 19.43 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है, जिसमें 6.63 करोड़ नकद और 8.20 किलोग्राम सोना शामिल है।
कांकेर में अभी भी सक्रिय कैडर
कांकेर जिले में पिछले कुछ दिनों में 11 नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं, लेकिन अभी भी करीब 14 नक्सली सक्रिय बताए जा रहे हैं। इनमें डीवीसीएम स्तर के कुछ बड़े कैडर भी शामिल हैं। पुलिस अब आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों की मदद से बाकी सक्रिय नक्सलियों तक पहुंचने और उन्हें मुख्यधारा में लाने की कोशिश कर रही है।
दंतेवाड़ा को नक्सल मुक्त होने का दावा
दंतेवाड़ा जिले में भी “पूना मारगेम-पुनर्वास से पुनर्जीवन” अभियान के तहत सरेंडर कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 5 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। इनमें 4 महिला कैडर शामिल हैं। पुलिस ने दावा किया है कि जिले में अब नक्सलवाद का प्रभाव लगभग समाप्त हो चुका है और दंतेवाड़ा को नक्सल मुक्त घोषित किया जा सकता है।
केंद्रीय गृह मंत्री का बयान
इस बीच अमित शाह ने संसद में नक्सलवाद पर चर्चा के दौरान कहा कि बस्तर क्षेत्र से नक्सलवाद लगभग खत्म हो चुका है। उन्होंने बताया कि सरकार ने बस्तर के गांवों में विकास कार्यों को तेज किया है, जिसमें स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और राशन व्यवस्था शामिल हैं। इससे स्थानीय लोगों का भरोसा बढ़ा है और नक्सलियों का प्रभाव कमजोर हुआ है।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान को मिली यह बड़ी सफलता सुरक्षा बलों के लिए अहम मानी जा रही है। लगातार हो रहे सरेंडर और बड़ी आर्थिक बरामदगी से यह संकेत मिल रहे हैं कि नक्सली नेटवर्क कमजोर पड़ रहा है। हालांकि, कुछ इलाकों में अभी भी सक्रियता बनी हुई है, जिससे पूरी तरह नक्सल मुक्त होने के लिए अभियान जारी रखना जरूरी है।
Author: THE CG NEWS
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