ईरान में सत्ता संघर्ष तेज: IRGC के बढ़ते प्रभाव से राष्ट्रपति और शीर्ष नेतृत्व के बीच टकराव गहराया

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ईरान में इन दिनों सत्ता को लेकर अंदरूनी खींचतान तेज होती दिखाई दे रही है। ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, देश की ताकतवर अर्धसैनिक संस्था इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है, जिससे सरकार और सैन्य तंत्र के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। हालात ऐसे हैं कि राष्ट्रपति मसूद पजशकियान की भूमिका सीमित होती नजर आ रही है और महत्वपूर्ण फैसलों में उनकी पकड़ कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है।

राष्ट्रपति के अधिकारों पर IRGC की पकड़

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान कई अहम निर्णय लेने में असमर्थ हो गए हैं। बताया जा रहा है कि IRGC न केवल सुरक्षा मामलों में, बल्कि सरकार के प्रशासनिक फैसलों में भी दखल दे रहा है। हाल ही में राष्ट्रपति द्वारा खुफिया मंत्री की नियुक्ति की कोशिश को भी IRGC ने रोक दिया। यह नियुक्ति हुसैन देहगान के नाम पर की जानी थी, लेकिन IRGC नेतृत्व ने इसे मंजूरी नहीं दी।

ईरान की परंपरागत व्यवस्था में सुरक्षा और खुफिया मामलों में अंतिम निर्णय सुप्रीम लीडर की सहमति से लिया जाता है, लेकिन वर्तमान स्थिति में यह प्रक्रिया भी प्रभावित होती दिख रही है। इससे यह संकेत मिल रहा है कि सत्ता का संतुलन अब धीरे-धीरे सैन्य तंत्र की ओर झुक रहा है।

सुप्रीम लीडर से दूरी और रहस्य बरकरार

स्थिति को और जटिल बनाता है सुप्रीम लीडर से जुड़ा रहस्य। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि राष्ट्रपति पजशकियान की मुलाकात सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई से नहीं हो पा रही है। बताया जा रहा है कि IRGC ने उनके चारों ओर कड़ी सुरक्षा घेरा बना दिया है, जिससे न केवल राजनीतिक बल्कि प्रशासनिक संपर्क भी सीमित हो गया है।

मुजतबा खामेनेई सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आ रहे हैं और उनके संदेश भी सीधे प्रसारित होने के बजाय माध्यमों के जरिए पढ़कर सुनाए जा रहे हैं। इस स्थिति ने देश में नेतृत्व को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है। कुछ रिपोर्ट्स में उनकी सेहत को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं, जिससे राजनीतिक अनिश्चितता और बढ़ गई है।

अमेरिका के साथ बातचीत पर भ्रम की स्थिति

इसी बीच, अमेरिका और ईरान के संबंधों को लेकर भी विरोधाभासी दावे सामने आए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में दावा किया कि दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए बातचीत जारी है और उनकी टीम कुछ ईरानी नेताओं के संपर्क में है। हालांकि, ईरान सरकार ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया।

ईरानी अधिकारियों का कहना है कि किसी भी प्रकार की सीधी बातचीत नहीं हो रही है। इस विरोधाभास ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि ईरान में वास्तविक निर्णय लेने की शक्ति किसके पास है—सरकार के पास या IRGC के पास।

IRGC की बढ़ती ताकत और आर्थिक पकड़

विश्लेषकों का मानना है कि ईरान में मौजूदा सत्ता शून्य का लाभ IRGC उठा रहा है। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद स्थापित यह संगठन अब केवल सैन्य शक्ति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी इसकी मजबूत पकड़ है।

तेल, बैंकिंग, परिवहन और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में IRGC की भागीदारी ने इसे आर्थिक रूप से भी बेहद शक्तिशाली बना दिया है। यही वजह है कि मौजूदा संकट के दौर में यह संस्था सरकार से ऊपर उठकर निर्णय लेने की स्थिति में दिखाई दे रही है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण और वैश्विक चिंता

ईरान के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी IRGC का नियंत्रण बढ़ गया है। यह क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मार्ग पर सख्त नियंत्रण के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ गई है।

ईरान की आंतरिक राजनीतिक स्थिति, सुप्रीम लीडर की अस्पष्ट स्थिति और IRGC के बढ़ते प्रभाव ने न केवल देश के भीतर बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अस्थिरता की आशंका बढ़ा दी है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि ईरान में सत्ता का संतुलन किस दिशा में जाता है और इसका अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर क्या असर पड़ता है।

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Author: THE CG NEWS

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