
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव, खासकर अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे टकराव के बीच देश में खाद आपूर्ति को लेकर चिंता गहराने लगी है। खरीफ सीजन नजदीक आने के साथ ही किसानों ने सरकार से उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और कालाबाजारी पर सख्ती से रोक लगाने की मांग की है। किसान संगठनों का कहना है कि पिछले अनुभवों को देखते हुए इस बार पहले से तैयारी करना बेहद जरूरी है, ताकि खेती प्रभावित न हो।
खरीफ सीजन से पहले पर्याप्त स्टॉक की मांग
किसान नेता तेजराम विद्रोही ने कहा कि सरकार को हर साल खरीफ सीजन में होने वाली खेती के रकबे और जरूरतों का अंदाजा पहले से होता है। ऐसे में उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक समय रहते तैयार रखना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय पर खाद उपलब्ध नहीं हुई, तो इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा और किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा।
तेजराम विद्रोही ने रूस-यूक्रेन युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि उस दौरान खाद की भारी कमी देखने को मिली थी, जिससे किसानों को लंबी कतारों में लगना पड़ा और कई जगहों पर उन्हें मनचाही मात्रा में उर्वरक नहीं मिल पाया। उन्होंने कहा कि इस बार ऐसी स्थिति दोहराई नहीं जानी चाहिए और सरकार को सस्ती दरों पर खाद उपलब्ध करानी चाहिए।
कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना
इस मुद्दे पर कांग्रेस ने भी राज्य सरकार को घेरते हुए श्वेतपत्र जारी करने की मांग की है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि सरकार केवल दावों और बयानों तक सीमित है, जबकि जमीनी स्तर पर कोई ठोस तैयारी नजर नहीं आ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली बार भी किसानों को भारी संकट का सामना करना पड़ा था।
सुशील आनंद शुक्ला के अनुसार, पिछले खरीफ सीजन में लगभग 4.5 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की आवश्यकता थी, लेकिन शुरुआती दो महीनों में केवल 80 हजार मीट्रिक टन ही उपलब्ध कराया गया। इससे किसानों को यूरिया, डीएपी और पोटाश के लिए दर-दर भटकना पड़ा और खेती का समय प्रभावित हुआ।
कालाबाजारी के आरोप और किसानों की परेशानी
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि उर्वरकों की कमी का फायदा उठाकर बिचौलियों ने कालाबाजारी की और किसानों को तीन से चार गुना अधिक कीमत पर खाद खरीदने को मजबूर होना पड़ा। पार्टी का कहना है कि यदि इस बार भी ऐसी स्थिति बनती है, तो इसके लिए पूरी तरह सरकार जिम्मेदार होगी।
किसानों का भी कहना है कि कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार को कड़ी निगरानी व्यवस्था लागू करनी चाहिए। यदि समय पर और उचित दाम पर खाद उपलब्ध नहीं होगी, तो छोटे और मध्यम किसानों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ेगा।
सरकार से पारदर्शिता की मांग
कांग्रेस ने कृषि मंत्री रामविचार नेताम से साफ तौर पर जवाब देने को कहा है कि इस साल उर्वरकों की कुल मांग कितनी है और अब तक कितना स्टॉक तैयार किया गया है। पार्टी का कहना है कि केवल विपक्ष पर आरोप लगाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि ठोस कदम उठाने होंगे।
शुक्ला ने कहा कि सरकार को उर्वरकों की उपलब्धता, वितरण और स्टॉक की स्थिति पर एक विस्तृत श्वेतपत्र जारी करना चाहिए, ताकि किसानों और आम जनता को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सके। इससे पारदर्शिता भी बढ़ेगी और अफवाहों पर भी रोक लगेगी।
अंतरराष्ट्रीय हालात का असर और बढ़ती चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में संभावित बाधाओं का असर भारत में उर्वरकों की उपलब्धता पर भी पड़ सकता है। ऐसे में सरकार के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वह समय रहते तैयारी कर ले और किसी भी संभावित संकट से निपटने के लिए रणनीति बनाए।
खरीफ सीजन देश की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम होता है। ऐसे में यदि खाद की कमी होती है, तो इसका असर न केवल उत्पादन पर बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि किसान और विपक्ष दोनों सरकार से जल्द और ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।
Author: THE CG NEWS
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