डेटिंग ऐप्स का बदलता ट्रेंड: 40 प्लस उम्र के लोग भी तेजी से हो रहे सक्रिय, भारत 2027 तक बनेगा दूसरा सबसे बड़ा बाजार

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भारत में डेटिंग ऐप्स का चलन अब केवल युवाओं तक सीमित नहीं रह गया है। तेजी से बदलते सामाजिक और डिजिटल माहौल के बीच 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोग भी इन प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय रूप से जुड़ रहे हैं। इंडस्ट्री से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक देश में डेटिंग ऐप्स के उपयोगकर्ताओं की संख्या 10 करोड़ से अधिक हो चुकी है। निवेश प्लेटफॉर्म स्मॉलकेस की रिसर्च के अनुसार, वर्ष 2027 तक भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा डेटिंग सर्विस मार्केट बन सकता है। यह बदलाव केवल तकनीकी नहीं बल्कि सामाजिक सोच और रिश्तों की बदलती परिभाषा को भी दर्शाता है।

विवाहेत्तर संबंधों के लिए भी बढ़ा रुझान

डेटिंग ऐप्स के बढ़ते उपयोग के पीछे एक बड़ा कारण यह भी है कि अब विवाहेत्तर संबंधों को लेकर समाज में दृष्टिकोण बदल रहा है। एडल्टरी को अपराध की श्रेणी से बाहर किए जाने के बाद ऐसे प्लेटफॉर्म्स पर लोगों की भागीदारी और बढ़ी है। ग्लीडेन जैसे ऐप, जो विशेष रूप से विवाहेत्तर संबंधों पर केंद्रित हैं, भारत में 40 लाख से अधिक यूजर्स का आंकड़ा पार कर चुके हैं। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म पर महिलाओं की संख्या पिछले कुछ वर्षों में ढाई गुना तक बढ़ी है। यह ट्रेंड समाज में तेजी से हो रहे बदलावों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है।

गहरे सामाजिक परिवर्तन का संकेत

विशेषज्ञों का मानना है कि 40 प्लस उम्र के लोगों की डेटिंग ऐप्स पर सक्रियता केवल ‘कैजुअल डेटिंग’ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक गहरे सामाजिक परिवर्तन का संकेत है। फोर्ब्स इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पारंपरिक विवाह संस्था अब भी महत्वपूर्ण है, लेकिन उसके भीतर और बाहर रिश्तों की परिभाषा बदल रही है। कॉर्पोरेट जीवन की व्यस्तता और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच भावनात्मक जुड़ाव की कमी लोगों को डिजिटल माध्यमों की ओर आकर्षित कर रही है। इप्सोस के एक सर्वे में सामने आया कि कई लोग केवल रोमांच या भावनात्मक संतुलन के लिए भी इन प्लेटफॉर्म्स का सहारा लेते हैं।

पुरुष और महिलाओं की प्राथमिकताएं अलग

डेटिंग ऐप्स पर 40 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों और महिलाओं की प्राथमिकताएं अलग-अलग देखी जा रही हैं। क्वैकक्वैक ऐप की रिपोर्ट के अनुसार, इस उम्र की महिलाएं ऐसे रिश्ते तलाशती हैं, जहां भावनात्मक सुरक्षा और समझ हो। वे ऐसे साथी चाहती हैं जो खुले विचारों वाले हों और भावनात्मक रूप से उपलब्ध रहें। वहीं पुरुष आमतौर पर ऐसे संबंधों की ओर आकर्षित होते हैं जो स्थिर और प्रबंधनीय हों। ऐप के फाउंडर रवि मित्तल का कहना है कि भारत में अब उम्र डेटिंग के लिए बाधा नहीं रह गई है और हर पीढ़ी की अपनी अलग प्राथमिकताएं हैं।

रिश्तों से जुड़े अपराध भी बढ़े

हालांकि, इस बदलते ट्रेंड के साथ कुछ चिंताजनक पहलू भी सामने आए हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की सितंबर 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, देश में महिलाओं के खिलाफ 4.48 लाख अपराध दर्ज किए गए, जो पिछले एक दशक में सबसे अधिक हैं। इनमें से कई मामले रिश्तों से जुड़े विवादों से जुड़े हैं। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और राजस्थान जैसे राज्यों में ऐसे मामलों की संख्या अधिक पाई गई है। एक सर्वे के मुताबिक, करीब 59% शादियां पार्टनर की बेवफाई के कारण टूट रही हैं।

इसके अलावा, ‘स्वाइप रॉन्ग’ रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि बच्चों के खिलाफ अपराध करने वाले लोग डेटिंग ऐप्स का उपयोग सामान्य लोगों की तुलना में चार गुना अधिक करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्लेटफॉर्म्स पर मजबूत पहचान सत्यापन प्रणाली लागू करना जरूरी है।

पहचान छिपाने की सुविधा और क्षणिक आकर्षण

क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. काकोली राय के अनुसार, समाज में तेजी से बदलाव आ रहा है और डेटिंग ऐप्स इसका एक बड़ा कारण बन रहे हैं। पहले संयुक्त परिवार और सामाजिक दबाव लोगों को सीमाओं में बांधे रखते थे, लेकिन अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर पहचान छिपाना आसान है। लोग अक्सर क्षणिक आनंद और रोमांच के लिए इन ऐप्स का उपयोग करते हैं, जहां रिश्तों में जिम्मेदारी कम होती है।

उन्होंने बताया कि वैवाहिक जीवन में बढ़ती नीरसता और अकेलेपन की भावना भी लोगों को इन प्लेटफॉर्म्स की ओर आकर्षित कर रही है। डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार के साथ अब लोगों के लिए नए रिश्ते बनाना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है।

कुल मिलाकर, डेटिंग ऐप्स का बढ़ता चलन भारतीय समाज में हो रहे व्यापक बदलावों का संकेत है। जहां एक ओर यह लोगों को नए अवसर और भावनात्मक जुड़ाव का माध्यम दे रहा है, वहीं दूसरी ओर इसके साथ जुड़े जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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Author: THE CG NEWS

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