
छत्तीसगढ़ में 1 मई से शुरू होने जा रही जनगणना को लेकर शिक्षकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। गर्मी की छुट्टियों के दौरान जनगणना ड्यूटी लगाए जाने के फैसले का शिक्षक संगठनों ने कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि भीषण गर्मी के बीच घर-घर जाकर सर्वे करना न केवल कठिन है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। इस मुद्दे को लेकर शिक्षकों ने शासन से तत्काल पुनर्विचार की मांग की है।
भीषण गर्मी में डोर-टू-डोर सर्वे पर आपत्ति
शिक्षकों का कहना है कि मई और जून के महीनों में प्रदेश में तापमान काफी अधिक रहता है, जिससे लंबे समय तक बाहर रहकर काम करना बेहद मुश्किल हो जाता है। ऐसे में घर-घर जाकर जानकारी जुटाने की जिम्मेदारी देना अव्यवहारिक है। शिक्षकों के अनुसार, गर्मी की छुट्टियां आमतौर पर आराम और पुनर्स्थापन के लिए होती हैं, लेकिन इसी समय उन्हें फील्ड ड्यूटी में लगाया जाना उनके अधिकारों के विपरीत है।
छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने कहा कि यह निर्णय जमीनी परिस्थितियों को नजरअंदाज करके लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इतनी गर्मी में लगातार बाहर रहकर सर्वे करना शिक्षकों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है, खासकर तब जब उन्हें लंबे समय तक धूप में काम करना पड़े।
डिजिटल प्रक्रिया और स्मार्टफोन की बाध्यता भी बनी समस्या
इस बार जनगणना प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाने का निर्णय लिया गया है, जिसके तहत कर्मचारियों को मोबाइल ऐप के माध्यम से डेटा दर्ज करना होगा। शासन के निर्देशानुसार, जनगणना कार्य में लगे कर्मचारियों के पास एंड्रॉयड 12.0 या उससे ऊपर के वर्जन वाला स्मार्टफोन होना अनिवार्य किया गया है।
यही शर्त शिक्षकों के लिए एक नई परेशानी बन गई है। कई शिक्षकों के पास पुराने मोबाइल फोन हैं, जो इस तकनीकी आवश्यकता को पूरा नहीं करते। ऐसे में उन्हें नया स्मार्टफोन खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय सहायता के इस तरह की अनिवार्यता थोपना उचित नहीं है।
1 मई से शुरू होगा जनगणना का पहला चरण
प्रदेश में जनगणना 2027 के तहत पहला चरण 1 मई से 30 मई 2026 तक आयोजित किया जाएगा। इस चरण में ‘हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस’ के अंतर्गत प्रत्येक घर, परिवार और बुनियादी सुविधाओं का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इसके लिए कर्मचारियों को घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करनी होगी।
इस बार सरकार ने जनगणना प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और आसान बनाने के लिए डिजिटल माध्यम अपनाया है। 16 अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच नागरिकों को ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करने का विकल्प भी दिया गया है, जिसे ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ कहा जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत जानकारी भरने वाले नागरिकों को एक यूनिक आईडी दी जाएगी, जिसे बाद में फील्ड कर्मचारियों को दिखाना होगा।
33 बिंदुओं पर जुटाई जाएगी जानकारी
जनगणना के इस चरण में घर और परिवार से जुड़े कुल 33 बिंदुओं पर जानकारी एकत्र की जाएगी। इसमें मकान की स्थिति, उसका उपयोग (रहवासी या व्यावसायिक), निर्माण की गुणवत्ता (कच्चा या पक्का), परिवारों की संख्या जैसी जानकारियां शामिल होंगी। इसके अलावा पेयजल, शौचालय, बिजली, खाना पकाने के ईंधन, इंटरनेट, टीवी और रेडियो जैसी बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता का भी विवरण लिया जाएगा।
साथ ही घर में रहने वाले सदस्यों की संख्या, उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति और उपयोग किए जाने वाले वाहनों की जानकारी भी दर्ज की जाएगी। इस व्यापक डेटा संग्रह का उद्देश्य भविष्य की नीतियों और योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाना है।
समय और प्रक्रिया में बदलाव की मांग
शिक्षक संगठनों ने सरकार से मांग की है कि जनगणना की समय-सीमा और प्रक्रिया पर पुनर्विचार किया जाए। उनका सुझाव है कि इस कार्य को ऐसे समय में किया जाए जब मौसम अनुकूल हो और शिक्षकों को स्वास्थ्य संबंधी जोखिम का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही डिजिटल उपकरणों के लिए वित्तीय सहायता या वैकल्पिक व्यवस्था भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
फिलहाल, इस मुद्दे को लेकर शिक्षकों और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बनती दिख रही है। यदि जल्द ही कोई समाधान नहीं निकाला गया, तो यह विरोध और अधिक व्यापक रूप ले सकता है, जिससे जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य पर भी असर पड़ने की आशंका है।
Author: THE CG NEWS
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