
ईरान पर इज़रायल का बड़ा सैन्य हमला, कई अहम ठिकानों को बनाया निशाना
मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर चरम पर है। इज़रायल ने एक अप्रत्याशित और गंभीर हमला ईरान पर कर दिया है। इस हमले में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के दो शीर्ष सैन्य अधिकारी मारे गए हैं। साथ ही ईरान के एक वरिष्ठ परमाणु वैज्ञानिक की भी मौत की पुष्टि हुई है। यह हमला ऐसे समय पर हुआ है जब क्षेत्रीय हालात पहले से ही नाजुक थे और दुनिया भर की निगाहें इज़रायल-ईरान के रिश्तों पर टिकी थीं।
हमले का तरीका और टारगेट: ड्रोन और मिसाइलों से ईरान की संवेदनशील साइट्स को किया गया निशाना
सूत्रों के मुताबिक, यह हमला कई फेज़ में किया गया। इज़रायली सेना ने ड्रोन और क्रूज़ मिसाइलों के जरिए ईरान के मिलिट्री और न्यूक्लियर रिसर्च सेंटरों को निशाना बनाया। हमले का केंद्र तेहरान और इसके आसपास के क्षेत्रों में था। हमले में IRGC के दो शीर्ष कमांडर मारे गए हैं, जिनके नाम फिलहाल गोपनीय रखे जा रहे हैं, लेकिन खुफिया सूत्रों के अनुसार वे ईरान की डिफेंस और न्यूक्लियर रणनीतियों से सीधे जुड़े थे।
इसके अलावा, ईरान के प्रसिद्ध परमाणु वैज्ञानिक डॉ. सैयद हुसैनी की भी इस हमले में मौत हो गई है। वह ईरान के एक गुप्त परमाणु प्रोग्राम से जुड़े माने जाते थे। उनकी मौत से ईरान की न्यूक्लियर नीति को बड़ा झटका लग सकता है।
ईरानी सुप्रीम लीडर का बयान: “इज़रायल ने लाल रेखा पार की, अब उसे जवाब भुगतना होगा”
हमले के तुरंत बाद, ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली ख़ामेनेई ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि “इज़रायल ने ईरान की संप्रभुता और सुरक्षा पर सीधा हमला किया है। यह एक युद्ध की घोषणा जैसा है, और इसका जवाब ज़रूर दिया जाएगा। इज़रायल को इसकी सजा मिलेगी।”
ख़ामेनेई ने यह भी कहा कि ईरान अपने शहीद वैज्ञानिकों और सैनिकों का बदला लेने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। उनका इशारा सीधा-सीधा एक बड़े जवाबी हमले की तरफ था।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र ने जताई चिंता
इस हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता की लहर दौड़ गई है। संयुक्त राष्ट्र ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है। अमेरिका ने इस हमले को लेकर कोई सीधी टिप्पणी नहीं की है लेकिन सूत्रों के अनुसार वह स्थिति पर करीब से नजर बनाए हुए है।
रूस और चीन ने भी इज़रायल की कार्रवाई को “उत्तेजनात्मक” बताया है और क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा बताया है।
आने वाले दिन बेहद संवेदनशील: पूरे मध्य पूर्व में हाई अलर्ट
ईरान और इज़रायल के बीच इस ताजा संघर्ष ने पूरे मध्य पूर्व को हाई अलर्ट पर ला दिया है। लेबनान, सीरिया और यमन जैसे देशों में भी तनाव बढ़ सकता है क्योंकि इन क्षेत्रों में ईरान समर्थित संगठन जैसे हिज़्बुल्ला और हूती सक्रिय हैं।
निष्कर्ष: क्या यह तीसरे विश्व युद्ध की आहट?
इज़रायल-ईरान संघर्ष की यह घटना केवल दो देशों तक सीमित नहीं रह सकती। इसमें अमेरिका, रूस, चीन जैसे वैश्विक ताकतों के हित जुड़े हुए हैं। ऐसे में आने वाले दिन बेहद अहम होंगे। दुनिया की नजर इस बात पर है कि ईरान क्या जवाब देता है और क्या यह संघर्ष एक वैश्विक संकट में तब्दील होता है।
Author: THE CG NEWS
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