
दिल्ली ब्लास्ट की दर्दनाक घटना को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि गृह मंत्रालय अब उनके नियंत्रण में नहीं है। यदि वे देश की सुरक्षा नहीं संभाल पा रहे हैं तो उन्हें या तो जिम्मेदारी लेनी चाहिए या पद छोड़ देना चाहिए। वहीं, भाजपा नेताओं ने इस मुद्दे पर राजनीति करने को गलत ठहराया और कहा कि ऐसी त्रासदी के वक्त विपक्ष को संवेदनशील रुख अपनाना चाहिए।
भूपेश बोले- एजेंसियां विपक्ष की जासूसी में लगी हैं, आतंकियों पर ध्यान नहीं
जगदलपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान भूपेश बघेल ने कहा कि दिल्ली ब्लास्ट जैसी घटना इस बात का सबूत है कि केंद्र की सुरक्षा एजेंसियां अपना मूल काम छोड़ चुकी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन एजेंसियों का काम आतंकवादियों को पकड़ना है, वे विपक्षी नेताओं की जासूसी और पत्रकारों की निगरानी में व्यस्त हैं। बघेल ने कहा, “अगर गृह मंत्रालय अपना काम नहीं कर पा रहा, तो अमित शाह को इस्तीफा देना चाहिए। देश की राजधानी में इतनी बड़ी घटना हो गई और गृहमंत्री चुनावी दौरे में व्यस्त हैं, यह गैरजिम्मेदाराना रवैया है।”
भाजपा ने कहा- आतंकवाद पर राजनीति नहीं होनी चाहिए
इस बयान पर भाजपा नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि किसी भी भारतीय नागरिक का अपने ही देश में ब्लास्ट करने का सवाल नहीं उठता। यह देश विरोधी संगठनों की करतूत है, जो भारत की शांति को बिगाड़ना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा एजेंसियां जांच में जुटी हैं और जब तक रिपोर्ट नहीं आती, तब तक किसी को राजनीति नहीं करनी चाहिए।
राज्य के गृह मंत्री विजय शर्मा ने भी कहा कि पुलवामा हमले के बाद जिस तरह भारत ने जवाब दिया था, उसी तरह अब भी सरकार सख्त कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा, “यह राजनीति करने का वक्त नहीं है। पहले स्थिति सामान्य होने दें, अंतिम संस्कार तक नहीं हुआ और विपक्ष बयानबाजी में जुट गया। यह राजनीति में गिरावट का संकेत है।” दिल्ली ब्लास्ट में अब तक 12 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।
भूपेश बघेल के गंभीर सवाल — पुलवामा से दिल्ली तक सुरक्षा चूक पर उठाए मुद्दे
भूपेश बघेल ने सुरक्षा एजेंसियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पुलवामा में सैकड़ों किलो RDX आखिर आया कहां से था? पहलगाम में आतंकी कैसे पहुंचे? उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं के समय सरकार जवाबदेही से बच नहीं सकती। उन्होंने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने भारत-पाक युद्ध को रोका, जबकि अब अमित शाह बिहार में चुनावी रैलियों में व्यस्त हैं और दिल्ली में धमाका हो गया। बघेल ने कहा, “या तो अमित शाह चुनाव प्रचार करें या गृह मंत्रालय संभालें, दोनों काम एक साथ नहीं चल सकते।”
नक्सलवाद और धान खरीदी पर भी बोले भूपेश
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा शासनकाल में छत्तीसगढ़ में नक्सल घटनाओं में बढ़ोतरी हुई थी। उन्होंने कहा कि 2014 से 2018 के बीच राज्य में रमन सिंह सरकार थी और केंद्र में भी भाजपा की सरकार थी, तब नक्सली हिंसा के मामले ज्यादा बढ़े। कांग्रेस सरकार के दौरान संवाद बढ़ाने और स्थानीय नीति सुधार से हालात बदले थे।
उन्होंने कहा कि अब भाजपा शासन में स्थिति फिर से बिगड़ रही है। उन्होंने किसानों की समस्या का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू करने की घोषणा की है, लेकिन अधिकारी और कर्मचारी हड़ताल पर हैं। अब तक किसी किसान को टोकन नहीं मिला है। यूरिया की कमी, बीमार फसलें और बढ़ते बिजली बिलों से किसान परेशान हैं। ऐसे में तय तारीख पर धान खरीदी शुरू होना मुश्किल लग रहा है।
SIR और जनगणना पर भी जताई चिंता
भूपेश बघेल ने SIR (State Integrated Register) को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची का अधिकार निर्वाचन आयोग का है, लेकिन सरकार इस पर सीधा हस्तक्षेप कर रही है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही स्पष्ट किया था कि आधार कार्ड को मतदाता सूची के लिए जरूरी मान्यता नहीं दी जा सकती। बिहार में जब SIR लागू किया गया था, तब भी विवाद खड़ा हुआ था।
उन्होंने बस्तर क्षेत्र की जनगणना का मुद्दा उठाते हुए कहा कि 2011 की जनगणना में बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर के कई इलाकों में सर्वे ही नहीं हो पाया था। वहां के लोगों के पास आधार, जॉब कार्ड या निवास प्रमाण पत्र तक नहीं हैं। बघेल ने आरोप लगाया कि रमन सिंह के कार्यकाल में स्कूल बंद थे, जिसके चलते आज भी कई युवाओं के पास शैक्षणिक प्रमाण पत्र नहीं हैं।
महिलाओं और आदिवासियों के नाम कटने की आशंका
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि SIR के बहाने बड़ी संख्या में महिलाओं और आदिवासियों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि कई महिलाएं शादी के बाद दूसरे जिलों में चली जाती हैं और उनके लिए पुराने दस्तावेज जुटाना मुश्किल होता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई महिला कांकेर की मूल निवासी है और ससुराल दंतेवाड़ा में है, तो क्या वह कांकेर जाकर अपने दस्तावेज लाएगी? इससे बड़ी संख्या में नाम काटे जाने का खतरा है।
निष्कर्ष — ब्लास्ट से निकली बहस अब सियासी जंग में बदली
दिल्ली ब्लास्ट की भयावह घटना ने जहां देश को हिला दिया है, वहीं इस मुद्दे पर सियासत भी गरमा गई है। कांग्रेस ने केंद्र की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं, तो भाजपा ने संवेदनशील समय में राजनीति न करने की अपील की है। फिलहाल जांच एजेंसियां मामले की तहकीकात में जुटी हैं, लेकिन सियासी बयानबाजी से यह साफ है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में रहेगा।
Author: THE CG NEWS
TheCGNews.in – छत्तीसगढ़ की सच्ची आवाज़ “TheCGNews.in” छत्तीसगढ़ का एक उभरता हुआ डिजिटल न्यूज़ पोर्टल है, जो प्रदेश की ज़मीन से जुड़ी, वास्तविक और निष्पक्ष खबरें लोगों तक पहुँचाने के मिशन के साथ कार्यरत है। इस पोर्टल की सबसे बड़ी ताकत है – स्थानीयता और विश्वसनीयता। TheCGNews.in का फोकस सिर्फ ब्रेकिंग न्यूज पर नहीं, बल्कि उन खबरों पर है जो आम लोगों के जीवन को प्रभावित करती हैं – गांव, कस्बों, पंचायत, युवाओं, शिक्षा, रोजगार, राजनीति, संस्कृति और जन-समस्याओं की सच्ची झलक यहाँ देखने को मिलती है। TheCGNews.in की खास बातें: • ✅ छत्तीसगढ़ की हर कोने से रिपोर्टिंग • ✅ सिर्फ सनसनी नहीं – समाधान की पत्रकारिता • ✅ युवाओं और किसानों की आवाज़ • ✅ भ्रष्टाचार, विकास और बदलाव की असली रिपोर्ट • ✅ हिंदी में सरल और स्पष्ट भाषा में खबरें







