बिहार चुनाव के एग्जिट पोल में NDA को बढ़त: एक्सिस माई इंडिया के सर्वे में NDA को 43% वोट शेयर, महागठबंधन को 41%; पोल ऑफ पोल्स में भी साफ बहुमत के संकेत

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बिहार विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण का मतदान खत्म होने के एक दिन बाद बुधवार को एक्सिस माई इंडिया का एग्जिट पोल सामने आया है। इस सर्वे के अनुसार राज्य में एक बार फिर NDA सरकार बनती नजर आ रही है। एक्सिस माई इंडिया ने अपने अनुमान में NDA को 43% वोट शेयर, महागठबंधन को 41%, प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी को 4% और अन्य को 12% वोट मिलने का अनुमान जताया है।

एक्सिस माई इंडिया का सर्वे: NDA को बहुमत का अनुमान

सर्वे के मुताबिक, NDA को राज्य में स्पष्ट बढ़त मिल सकती है। बिहार की 243 सीटों में से NDA को 154 सीटें, महागठबंधन को 83 और अन्य को 5 सीटें मिलने का अनुमान है। यह आंकड़ा पोल ऑफ पोल्स के औसत नतीजों पर आधारित है। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई में NDA एक बार फिर सत्ता में लौट सकता है।

पिछले चुनाव की तुलना में NDA के प्रदर्शन में सुधार दिख रहा है। 2020 के विधानसभा चुनाव में NDA को 125 सीटें मिली थीं, जबकि महागठबंधन को 110 सीटों पर सफलता मिली थी। इस बार सर्वे के मुताबिक NDA को करीब 29 सीटों का फायदा और महागठबंधन को 27 सीटों का नुकसान होता नजर आ रहा है।

भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है, जनसुराज का असर सीमित

सर्वे के मुताबिक भाजपा को सबसे ज्यादा 75 सीटें मिल सकती हैं, जबकि जेडीयू को 60 से 65 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं, कांग्रेस को 13 और RJD को 55 के आसपास सीटें मिल सकती हैं। प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी पहली बार मैदान में उतरी है, लेकिन सर्वे के मुताबिक उसका प्रभाव बहुत सीमित रहेगा। जनसुराज को 3 से 5 सीटों तक सीमित बताया गया है।

दो चरणों में हुआ मतदान, रिकॉर्ड वोटिंग दर्ज

बिहार विधानसभा चुनाव इस बार दो चरणों में संपन्न हुआ। पहले चरण में 121 सीटों पर 65% मतदान हुआ, जबकि दूसरे चरण में रिकॉर्ड 68.5% वोटिंग दर्ज की गई। इस उच्च मतदान दर से सभी दलों ने अपनी-अपनी जीत के दावे मजबूत किए हैं। चुनाव परिणाम 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे।

दैनिक भास्कर पोल में भी NDA को बहुमत के संकेत

दैनिक भास्कर रिपोर्टर्स पोल में भी NDA को स्पष्ट बहुमत मिलने का अनुमान जताया गया है। इस सर्वे के अनुसार, NDA को 145 से 160 सीटें, महागठबंधन को 73 से 91 सीटें और अन्य को 5 से 10 सीटें मिलने की संभावना है। बीजेपी को 72–82 सीटें, जेडीयू को 59–68, एलजेपी को 4–5 और हम को 5 सीटें मिल सकती हैं। वहीं, RJD को 51–63, कांग्रेस को 12–15 और वामपंथी दलों को 6–9 सीटें मिलने का अनुमान है।

बिहार में एग्जिट पोल की विश्वसनीयता पर सवाल

हालांकि, बिहार में एग्जिट पोल्स के अनुमान कई बार गलत साबित हुए हैं। 2015 में अधिकांश एजेंसियों ने NDA को बढ़त दी थी, जबकि नतीजों में महागठबंधन ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया था। वहीं 2020 में उल्टा हुआ — ज्यादातर सर्वे ने महागठबंधन की जीत का अनुमान लगाया था, परंतु नतीजों में NDA ने 125 सीटें जीतकर सरकार बना ली। इसलिए इस बार के अनुमान को लेकर भी सतर्कता जरूरी है।

क्यों अक्सर बिहार में गलत साबित होते हैं एग्जिट पोल

विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार में एग्जिट पोल्स की सटीकता चार प्रमुख वजहों से कमजोर रहती है।

पहली वजह है माइग्रेंट वोटर्स — राज्य से बाहर काम करने वाले लाखों प्रवासी वोट देने के बाद लौटने की जल्दी में होते हैं, जिससे वे सर्वे सैंपल में शामिल नहीं हो पाते।

दूसरी वजह जातिआधारित वोटिंग पैटर्न है, जिसे छोटे सैंपल साइज के कारण सर्वे एजेंसियां सटीक रूप से कैप्चर नहीं कर पातीं।

तीसरी वजह साइलेंट वोटर्स का प्रभाव है — कई मतदाता अपने राजनीतिक रुझान को गुप्त रखते हैं और सर्वे के दौरान खुलकर नहीं बताते।

चौथी वजह महिला वोटर्स हैं — 2020 में बिहार में महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत 59.69% था, जो पुरुषों से अधिक था। महिलाएं अक्सर सर्वे में अपनी पसंद साझा नहीं करतीं, जिससे अनुमान प्रभावित होता है।

एग्जिट पोल क्या होता है

वोटिंग खत्म होने के बाद मतदाताओं से उनकी पसंद जानने के लिए किए गए सर्वे को एग्जिट पोल कहा जाता है। मतदान के दिन एजेंसियों के प्रतिनिधि मतदान केंद्रों के बाहर वोटर्स से सवाल पूछते हैं और उनके जवाबों के आधार पर अनुमान तैयार करते हैं। हालांकि यह सर्वे किसी अंतिम परिणाम का विकल्प नहीं होता, बल्कि एक संभावित रुझान दिखाता है।

बीते 18 महीनों में 7 चुनावों में 6 बार गलत साबित हुए पोल्स

पिछले 18 महीनों में हुए 7 राज्यों के विधानसभा चुनावों में से 6 में एग्जिट पोल नतीजों से भटक गए। महाराष्ट्र, हरियाणा, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर, झारखंड और आंध्र प्रदेश में अधिकांश सर्वे नतीजों से मेल नहीं खा पाए। केवल दिल्ली में पोल्स ने लगभग सही अनुमान लगाया। यह सिलसिला बताता है कि भारत में एग्जिट पोल अब भी एक अपूर्ण विज्ञान है, खासकर सामाजिक और राजनीतिक विविधता वाले राज्यों में।

नीतीश कुमार NDA के चेहरा, 9वीं बार सत्ता में वापसी की उम्मीद

NDA ने 2025 के चुनाव में नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री चेहरा घोषित किया है। नीतीश कुमार अब तक 9 बार बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और देश के सबसे लंबे समय तक पद पर बने रहने वाले नेताओं में शामिल हैं। वे कुर्मी समुदाय से आते हैं और NDA ने उन्हें आगे रखकर OBC, सवर्ण और महिला वोटर्स का संतुलन साधने की कोशिश की है।

महागठबंधन में तेजस्वी यादव का नेतृत्व

महागठबंधन ने इस बार तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री चेहरा बनाकर नई पीढ़ी और परिवर्तन की राजनीति को आगे बढ़ाने की रणनीति अपनाई है। तेजस्वी युवा और पहली बार वोट डालने वालों को टारगेट कर रहे हैं। RJD पारंपरिक रूप से यादव और मुस्लिम वोट बैंक पर आधारित रही है, लेकिन तेजस्वी इसे OBC, दलित और अल्पसंख्यक युवाओं तक विस्तार देने की कोशिश कर रहे हैं।

निष्कर्ष: एनडीए की बढ़त, लेकिन नतीजों का इंतजार जरूरी

सभी प्रमुख एग्जिट पोल्स में NDA की बढ़त नजर आ रही है, परंतु बिहार की राजनीति के जटिल समीकरणों को देखते हुए अंतिम नतीजे 14 नवंबर को ही तस्वीर साफ करेंगे। 2020 की तरह अगर इस बार भी एग्जिट पोल गलत साबित हुए, तो बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है।

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Author: THE CG NEWS

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