
भारत और रूस के रक्षा सहयोग में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए रूस की संसद के निचले सदन स्टेट ड्यूमा ने मंगलवार को ‘रेसिप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक सपोर्ट’ यानी RELOS समझौते को मंजूरी दे दी। इस समझौते के लागू होने के बाद दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के सैन्य बेस, एयरफील्ड, पोर्ट और लॉजिस्टिक संसाधनों का इस्तेमाल कर सकेंगी। यह मंजूरी ऐसे समय दी गई है जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन कुछ दिनों बाद भारत आने वाले हैं, और उनकी यह यात्रा 23वें भारत-रूस वार्षिक सम्मेलन के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
RELOS समझौता इस साल 18 फरवरी को भारत और रूस के बीच साइन किया गया था। पिछले हफ्ते रूसी प्रधानमंत्री मिखाइल मिशुस्तिन ने इसे संसद के पास मंजूरी के लिए भेजा था। समझौते को दी गई यह अंतिम मंजूरी दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाती है। इसके तहत भारतीय और रूसी युद्धपोत, विमान, सैन्य टुकड़ियां और उपकरण एक-दूसरे के बेस पर ईंधन भरने, मरम्मत कराने और विभिन्न लॉजिस्टिक सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। खास बात यह है कि इन सेवाओं का खर्च दोनों देश बराबर शेयर करेंगे।
रूस और भारत के रिश्तों में नई मजबूती, सैन्य सहयोग होगा आसान
रूसी संसद के स्पीकर ने कहा कि भारत और रूस के संबंध दशकों से भरोसे और साझेदारी पर आधारित रहे हैं और RELOS उन रिश्तों को और मजबूत बनाएगा। इस समझौते के बाद दोनों देशों की सेनाएं शांति के समय अधिक सहजता से एक-दूसरे की मदद कर सकेंगी। रूस ने साफ कहा है कि भारत उसकी रणनीतिक प्राथमिकताओं में महत्वपूर्ण स्थान रखता है और यह रक्षा समझौता उसे और गहराई देता है।
नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने भी इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि भारत के अब अमेरिका, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और दक्षिण कोरिया सहित कई देशों के साथ ऐसे समझौते पहले से हैं और रूस के साथ RELOS होना भारत की वैश्विक रक्षा कूटनीति को और मजबूत करता है। यह समझौता अमेरिका और रूस के बीच किसी नए तनाव की स्थिति पैदा नहीं करेगा, क्योंकि यह सिर्फ लॉजिस्टिक सपोर्ट तक सीमित है, न कि किसी सैन्य गठबंधन जैसी संरचना तक।
जंग के दौरान इस्तेमाल की अनुमति नहीं, केवल शांति काल में मिलेगा लॉजिस्टिक सपोर्ट
सरकार के अनुसार यह समझौता किसी भी तरह के युद्ध, सैन्य टकराव या युद्धकालीन ऑपरेशन में लागू नहीं होगा। इसका उद्देश्य केवल लॉजिस्टिक सपोर्ट देना और शांतिपूर्ण समय में सैन्य सहयोग को बेहतर बनाना है।
लॉजिस्टिक सपोर्ट में ईंधन, हथियारों और उपकरणों की मरम्मत, स्टॉक रिफिल, मेडिकल सहायता, ट्रांजिट के दौरान सहयोग और प्रशिक्षण से जुड़े कार्य शामिल हैं। इसके जरिए नौसेना के जहाज लंबे मिशन पर अधिक समय तक रह सकेंगे और वायुसेना के ट्रांसपोर्ट व कॉम्बैट विमान रणनीतिक रूप से दूर-दराज क्षेत्रों में भी अधिक प्रभावी ढंग से संचालित हो सकेंगे।
भारत-रूस रक्षा सहयोग का विस्तार, S-400 और SU-57 पर भी ध्यान
पुतिन 4 दिसंबर को भारत पहुंचेंगे और दिल्ली में सीक्रेट लोकेशन पर रुकेंगे। सुरक्षा एजेंसियों ने राजधानी को मल्टी लेयर सिक्योरिटी कवर दे दिया है। रूस की एडवांस सिक्योरिटी टीम के 50 से ज्यादा अधिकारी पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं। पुतिन की इस यात्रा में सबसे ज्यादा फोकस रक्षा समझौतों पर रहने वाला है।
रूस पहले ही कह चुका है कि वह भारत को अपना अत्याधुनिक SU-57 स्टेल्थ फाइटर जेट देने के लिए तैयार है। साथ ही S-500 एयर डिफेंस सिस्टम पर भविष्य में सहयोग, ब्रह्मोस मिसाइल के अगले वर्जन पर काम और नौसेना के लिए संयुक्त रूप से वॉरशिप निर्माण जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
PTI के मुताबिक भारत और रूस के बीच S-400 मिसाइल सिस्टम की अतिरिक्त खरीद पर भी बातचीत हो सकती है। पाकिस्तान के खिलाफ हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में S-400 की क्षमता देखने के बाद भारत इस प्रणाली को और मजबूत करना चाहता है। पहले से खरीदे गए 5 S-400 सिस्टम में से 3 भारत को मिल चुके हैं, जबकि चौथे की डिलीवरी रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण रुकी हुई है।
यूरोपीय देशों के राजदूतों का विवादित लेख, भारत ने जताई नाराजगी
पुतिन की यात्रा से ठीक पहले ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के राजदूतों द्वारा एक भारतीय अखबार में लिखा गया लेख विवाद का कारण बन गया है। इस लेख में रूस पर आरोप लगाया गया कि वह यूक्रेन पर बहुत कठोर तरीके से हमला कर रहा है और शांति की कोशिशों को गंभीरता से नहीं ले रहा। यह भी कहा गया कि रूस साइबर हमलों और गलत सूचनाओं के जरिए वैश्विक अस्थिरता बढ़ा रहा है।
भारत के विदेश मंत्रालय ने इस लेख पर नाराजगी जताई। अधिकारियों ने कहा कि किसी तीसरे देश के बारे में भारत को सार्वजनिक मंच पर इस तरह की सलाह देना कूटनीतिक रूप से अनुचित है। पूर्व विदेश सचिव कन्वल सिब्बल ने भी इस लेख की आलोचना की और कहा कि यह भारत के आंतरिक मामलों में दखल जैसा कदम है तथा इसका उद्देश्य भारत–रूस संबंधों पर असर डालने की कोशिश हो सकता है।
Author: THE CG NEWS
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