
राज्य की शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए विधानसभा में स्कूल शिक्षा विभाग का 22 हजार 466 करोड़ रुपए का बजट ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इस बजट में शिक्षा को आधुनिक, डिजिटल और समावेशी बनाने के लिए कई नई योजनाओं और सुधारों का प्रावधान किया गया है। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने बजट पेश करते हुए कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता को बेहतर बनाना और छात्रों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय ज्ञान परंपरा से भी जोड़ना है। इसी उद्देश्य के तहत अब पहली कक्षा से ही बच्चों को योग और वैदिक गणित की शिक्षा दी जाएगी, वहीं स्कूलों में अंतिम पीरियड को खेल गतिविधियों के लिए अनिवार्य किया जाएगा ताकि विद्यार्थियों का शारीरिक और मानसिक विकास संतुलित रूप से हो सके।
पीएम श्री योजना के तहत आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे स्कूल
सरकार ने सरकारी स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करने के लिए पीएम श्री योजना के अंतर्गत 250 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। इस योजना के तहत चयनित स्कूलों में स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं, खेल सुविधाएं और कैरियर काउंसिलिंग जैसी व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। इन स्कूलों को ग्रीन स्कूल की अवधारणा के तहत पर्यावरण अनुकूल बनाया जाएगा। इसके साथ ही शिक्षकों को बेहतर प्रशिक्षण देने के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों की मदद ली जाएगी, ताकि शिक्षण पद्धति को और प्रभावी बनाया जा सके। सरकार का मानना है कि इन प्रयासों से सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में बनेंगे स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय
बजट में ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए 150 स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालयों की स्थापना का भी प्रावधान किया गया है। इन विद्यालयों के लिए बजट में 100 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं। सरकार का उद्देश्य है कि प्रत्येक ब्लॉक के ग्रामीण क्षेत्र में ऐसे स्कूल स्थापित किए जाएं जहां छात्रों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। इन स्कूलों में आधुनिक शिक्षण संसाधनों के साथ-साथ विज्ञान, तकनीक और खेल के लिए बेहतर सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे ग्रामीण छात्रों को शहरों के समान अवसर मिल सकें।
नवा रायपुर में बनेगा शिक्षा विभाग का प्रशासनिक भवन
स्कूल शिक्षा विभाग के प्रशासनिक कार्यों को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाने के लिए नवा रायपुर में एक आधुनिक प्रशासनिक कॉम्पोजिट भवन का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए बजट में प्रारंभिक तौर पर 5 करोड़ 90 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है। इस भवन में लोक शिक्षण संचालनालय, समग्र शिक्षा, संस्कृत विद्या मंडल, मदरसा बोर्ड और माध्यमिक शिक्षा मंडल सहित शिक्षा विभाग के कई प्रमुख कार्यालय संचालित होंगे। इससे विभागीय कार्यों में समन्वय बेहतर होगा और प्रशासनिक प्रक्रियाएं अधिक सुचारू रूप से संचालित की जा सकेंगी।
मार्कशीट और टीसी भी होंगी डिजिटल
सरकार ने विद्यार्थियों को शैक्षणिक दस्तावेज प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। नई व्यवस्था के तहत छात्रों की मार्कशीट और ट्रांसफर सर्टिफिकेट ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध कराए जाएंगे। इन दस्तावेजों पर क्यूआर कोड और यूनिक आईडी भी दी जाएगी, जिससे उनकी डिजिटल सत्यता की जांच आसानी से की जा सकेगी। इस व्यवस्था से फर्जी दस्तावेजों की समस्या पर भी नियंत्रण मिलने की उम्मीद है और छात्रों को अपने दस्तावेज प्राप्त करने के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
तीसरी कक्षा की परीक्षा अब टैबलेट पर होगी
शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल बदलाव की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल के तहत तीसरी कक्षा के छात्रों की बुनियादी साक्षरता और गणितीय ज्ञान की परीक्षा अब टैबलेट के माध्यम से ली जाएगी। पहले यह परीक्षा ओएमआर शीट पर आयोजित की जाती थी, लेकिन अब इसे पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। यह सर्वेक्षण एनसीईआरटी की इकाई ‘परख’ द्वारा आयोजित किया जाएगा, जिसमें देशभर के हजारों स्कूलों के विद्यार्थी शामिल होंगे।
देशभर के स्कूलों में होगा महा-सर्वेक्षण
इस सर्वेक्षण के तहत देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सभी 776 जिलों के करीब 10 हजार से अधिक सरकारी, अनुदान प्राप्त और निजी स्कूलों को शामिल किया जाएगा। अनुमान है कि इस प्रक्रिया में एक लाख से अधिक छात्र भाग लेंगे। सीबीएसई ने सभी संबद्ध स्कूलों के प्राचार्यों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं और स्पष्ट किया है कि जिन स्कूलों का चयन किया गया है, उनके लिए सर्वे के दिन स्कूल खुला रखना और छात्रों की उपस्थिति सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा।
डिजिटल परीक्षा से बेहतर होगा शिक्षा मूल्यांकन
राष्ट्रीय स्तर पर इस सर्वेक्षण के लिए एनसीईआरटी तकनीकी मार्गदर्शन दे रहा है, जबकि राज्यों में इसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी समग्र शिक्षा, एससीईआरटी, डाइट और जिला शिक्षा कार्यालयों को सौंपी गई है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल माध्यम से होने वाली यह परीक्षा छात्रों के सीखने के स्तर का अधिक सटीक आकलन करने में मदद करेगी। साथ ही डेटा संग्रह और परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया भी पहले की तुलना में अधिक तेज और प्रभावी होगी। सरकार को उम्मीद है कि इन नई पहलों से शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता और पारदर्शिता दोनों में सुधार आएगा।
Author: THE CG NEWS
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