
डोनाल्ड ट्रम्प, जो 2024 में फिर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार हैं, ने एक बड़ा बयान दिया है जो वैश्विक तकनीकी उद्योग को झटका दे सकता है। ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि उन्होंने ऐप्पल के सीईओ टिम कुक को स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका में बेचे जाने वाले iPhone अब अमेरिका में ही बनाए जाने चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता, तो ऐसे फोन पर 25% का आयात शुल्क (टैरिफ) लगाया जाएगा। यह कदम अमेरिकी विनिर्माण को पुनर्जीवित करने के ट्रम्प के एजेंडे का हिस्सा है।
ट्रम्प ने यह भी स्पष्ट किया कि यह नीति केवल ऐप्पल तक सीमित नहीं रहेगी। उन्होंने सैमसंग और अन्य विदेशी स्मार्टफोन निर्माताओं को भी चेतावनी दी कि यदि वे अमेरिका में निर्माण नहीं करते हैं, तो वे भी इस भारी टैरिफ के दायरे में आएंगे। इस कदम से चीन, भारत, वियतनाम और अन्य देशों में स्मार्टफोन निर्माण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि ये देश बड़े पैमाने पर इन उत्पादों का उत्पादन करते हैं।
🌍 यूरोपीय संघ पर 50% टैरिफ की धमकी
ट्रम्प ने सिर्फ स्मार्टफोन तक अपनी धमकी सीमित नहीं रखी। उन्होंने यूरोपीय संघ (EU) से आयात होने वाले सभी उत्पादों पर 50% तक टैरिफ लगाने की धमकी दी है। उन्होंने यह आरोप लगाया कि यूरोपीय कंपनियाँ अमेरिका से भारी मुनाफा कमाती हैं लेकिन अमेरिका में निवेश नहीं करतीं। यदि यूरोपीय कंपनियाँ अमेरिका में फैक्ट्रियां या विनिर्माण इकाइयाँ स्थापित नहीं करती हैं, तो यह टैरिफ 1 जून 2025 से प्रभावी हो सकता है।
इससे जर्मनी, फ्रांस, इटली जैसी यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं पर सीधा असर पड़ेगा, क्योंकि अमेरिका इन देशों के ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, शराब और लक्जरी वस्तुओं का बड़ा बाजार है। इससे अमेरिका और यूरोप के बीच व्यापार युद्ध छिड़ने की आशंका बढ़ गई है।
📉 आर्थिक प्रभाव और बाजार की प्रतिक्रिया
ट्रम्प के इन बयानों का सीधा असर वैश्विक शेयर बाजारों पर पड़ा। अमेरिकी डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 256 अंक गिर गया। ऐप्पल, जो अमेरिका की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है, उसके शेयरों में 2.6% की गिरावट आई, जिससे उसका बाजार पूंजीकरण $3 ट्रिलियन से नीचे चला गया।
सिर्फ ऐप्पल ही नहीं, बल्कि क्वालकॉम, इंटेल, मेटा और अन्य तकनीकी कंपनियों के शेयरों में भी हल्की गिरावट देखी गई। निवेशकों को डर है कि यदि ये टैरिफ लागू होते हैं तो प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ेगी, जिससे कीमतें बढ़ेंगी और मांग पर असर पड़ेगा। उपभोक्ताओं को अंततः महंगे स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का सामना करना पड़ सकता है।
भारत पर प्रभाव
भारत के लिए यह खबर खासतौर पर चिंताजनक है। ऐप्पल ने हाल के वर्षों में भारत में iPhone का निर्माण बड़े स्तर पर शुरू किया है। ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत, फॉक्सकॉन और विस्ट्रॉन जैसी कंपनियाँ भारत में iPhone असेंबल कर रही हैं। ये उत्पाद मुख्य रूप से निर्यात के लिए बनाए जाते हैं, जिनमें अमेरिका प्रमुख बाजार है।
यदि अमेरिका ऐसे iPhone पर टैरिफ लगाता है जो भारत में बने हैं, तो भारत में निर्माण की लागत और लाभप्रदता प्रभावित हो सकती है। इससे भारत में निवेश की गति धीमी हो सकती है और वियतनाम या अमेरिका जैसे अन्य स्थानों को वरीयता मिल सकती है। यह प्रधानमंत्री मोदी की ‘मेक इन इंडिया’ रणनीति के लिए एक बड़ी चुनौती हो सकती है।
Author: THE CG NEWS
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