दिल्ली में दम घोंटती हवा, केरल में तबाही मचाती बारिश: एक ओर स्मॉग का खतरा, दूसरी ओर मुल्लापेरियार डैम ओवरफ्लो से हाहाकार

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देश की राजधानी दिल्ली में दिवाली से पहले ही वायु प्रदूषण अपने चरम पर पहुँच चुका है। राजधानी और आसपास के एनसीआर क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है और कई स्थानों पर एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 350 के पार चला गया है। वहीं दक्षिण भारत के केरल राज्य में भारी बारिश ने स्थिति को गंभीर बना दिया है, जिससे मुल्लापेरियार डैम ओवरफ्लो होने की खबरों के बाद प्रशासन अलर्ट पर है।

राजधानी में सांस लेना हुआ मुश्किल

दिल्ली की हवा पिछले कुछ दिनों से लगातार जहरीली होती जा रही है। आनंद विहार, विवेक विहार, आईटीओ, पंजाबी बाग और द्वारका जैसे क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार तापमान में गिरावट और ठंडी हवाओं की कमी के कारण प्रदूषक कण जमीन के पास जमा हो रहे हैं, जिससे स्मॉग की मोटी परत शहर को ढक रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि दिवाली के बाद यह स्थिति और भी गंभीर हो सकती है क्योंकि पटाखों से निकलने वाला धुआं हवा में मौजूद जहरीले तत्वों को और बढ़ा देगा।

पराली जलाने की घटनाएं भी राजधानी की हवा में ज़हर घोल रही हैं। हरियाणा और पंजाब से आने वाली हवाओं में धुएं की मिलावट से दिल्ली की वायु गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ा है। पर्यावरण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में पराली जलाने की 2,000 से अधिक घटनाएं दर्ज की गई हैं।

GRAP लागू, निर्माण कार्यों पर सख्ती

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता नियंत्रण के लिए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण की पाबंदियाँ लागू कर दी गई हैं। इसके तहत निर्माण कार्यों पर आंशिक रोक, डीजल जनरेटर के उपयोग में कटौती और सड़कों पर पानी का छिड़काव अनिवार्य किया गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नागरिकों से अपील की है कि वे निजी वाहनों का उपयोग कम करें और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दें।

दिल्ली सरकार ने सभी स्कूलों में बच्चों के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसमें खुली हवा में खेलकूद गतिविधियों को सीमित करने और मास्क पहनने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और श्वास संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को घर से बाहर कम निकलने की चेतावनी दी है।

केरल में बारिश से तबाही, मुल्लापेरियार डैम खतरे के निशान पर

उधर दक्षिण भारत के केरल राज्य में भारी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। इडुकी, मलप्पुरम, कोट्टायम, एर्नाकुलम और कोझिकोड जिलों में जलभराव की स्थिति बन गई है। कई जगहों पर भूस्खलन और निचले इलाकों में पानी भरने से यातायात बाधित है। प्रशासन ने बारिश को देखते हुए छह जिलों में ऑरेंज अलर्ट और बाकी में येलो अलर्ट जारी किया है।

सबसे चिंताजनक स्थिति इडुकी और थेक्कडी क्षेत्र की बताई जा रही है, जहां मुल्लापेरियार डैम का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। जल संसाधन विभाग के अनुसार, बांध का जलस्तर 138 फीट के पार पहुंचने के बाद सुरक्षा की दृष्टि से कई गेट खोलने पड़े हैं। इससे पेरियार नदी के किनारे बसे इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।

कुमिली और नेडुमकंडम जैसे इलाकों में राहत शिविर खोले गए हैं। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने लोगों से अपील की है कि वे निचले इलाकों में न जाएं और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। कई जिलों में स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए गए हैं, जबकि मछुआरों को समुद्र में न जाने की हिदायत दी गई है।

एक ओर प्रदूषण, दूसरी ओर प्रलय जैसी बारिश

देश के उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों में मौसम की यह चरम स्थिति सरकार और पर्यावरण विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बन गई है। दिल्ली जहां जहरीली हवा से जूझ रही है, वहीं केरल में आसमान से लगातार बरसती बारिश ने जनजीवन ठप कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और असंतुलित मौसमीय पैटर्न देश के पर्यावरणीय संतुलन को खतरे में डाल रहे हैं।

पर्यावरणविदों ने सरकार से अपील की है कि वह दीर्घकालिक उपायों पर ध्यान दे, जैसे—ग्रीन एनर्जी के प्रयोग को बढ़ावा देना, सार्वजनिक परिवहन को सुलभ बनाना और शहरी क्षेत्रों में पेड़-पौधों की संख्या बढ़ाना। साथ ही, नागरिकों को भी अपने स्तर पर जिम्मेदारी निभानी होगी ताकि भविष्य में इस तरह के संकटों से बचा जा सके।

निष्कर्ष:

दिवाली से पहले दिल्ली की जहरीली हवा और केरल की बाढ़ जैसी स्थिति भारत की दो विपरीत पर्यावरणीय चुनौतियों की तस्वीर पेश कर रही है। एक ओर जहां प्रदूषण लोगों की सांसें छीन रहा है, वहीं दूसरी ओर भारी बारिश लोगों के घर बहा रही है। यह समय केवल चेतावनी नहीं, बल्कि चेतने का है — क्योंकि प्रकृति अब अपने संतुलन की कीमत हमसे वसूलने लगी है।

THE CG NEWS
Author: THE CG NEWS

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