
सर्दियों के आते ही लगभग हर किसी की एक ही शिकायत होती है—सुबह बिस्तर से उठने का मन नहीं करता, रात में जल्दी नींद आ जाती है और दिनभर किसी भी वक्त नींद चढ़ जाती है। यह सिर्फ आलस नहीं है, बल्कि हमारे शरीर की एक स्वाभाविक बायोलॉजिकल प्रतिक्रिया है। डॉक्टर बताते हैं कि ठंड के मौसम में ‘स्लीप हॉर्मोन’ मेलाटोनिन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे हमारे सोने-जागने का चक्र बदल जाता है। इसके साथ ही कम दिन, ज्यादा अंधेरा और शरीर का लो-टेम्परेचर भी हमें ज्यादा नींद महसूस कराता है। आइए समझते हैं इसका पूरा विज्ञान और साथ ही जानते हैं आपकी पूरी विंटर स्लीप गाइड।
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ठंड में बढ़ जाता है मेलाटोनिन, इसलिए ज्यादा आती है नींद
स्लीप एक्सपर्ट्स बताते हैं कि सर्दियों में दिन छोटे और रातें लंबी होने की वजह से हमारे शरीर को ज्यादा अंधेरा मिलता है। अंधेरा गिरते ही दिमाग का पीनियल ग्लैंड मेलाटोनिन अधिक मात्रा में रिलीज करता है। यह वही हॉर्मोन है जो शरीर को सोने का संकेत देता है।
ठंड में यह हॉर्मोन लगभग 30–40% तक ज्यादा एक्टिव हो सकता है, जिससे व्यक्ति को सामान्य मौसम की तुलना में जल्दी नींद आने लगती है। यही कारण है कि सर्दियों में बहुत लोग शाम को ही थकान महसूस करने लगते हैं और सुबह उठना मुश्किल हो जाता है। मेलाटोनिन का यही बढ़ा हुआ स्तर पूरे दिन आपको उनींदा रख सकता है।
लो टेम्परेचर से शरीर ‘एनर्जी सेव मोड’ में चला जाता है
ठंड के मौसम में शरीर का तापमान स्वाभाविक रूप से थोड़ा कम हो जाता है। डॉक्टरों के अनुसार जब बॉडी टेम्परेचर कम होता है, तो शरीर ऑटोमैटिक ‘एनर्जी सेव मोड’ में चला जाता है, जिससे एनर्जी बचाने के लिए मस्तिष्क आराम और नींद को प्राथमिकता देता है।
यही कारण है कि सर्दियों में देर रात जागने पर भी अगले दिन आपको भारीपन और नींद ज्यादा आती है। शरीर गर्मी की तुलना में ठंड में कम ऊर्जा खर्च करता है, इसलिए रिलैक्सेशन की इच्छा अधिक होती है।
कम धूप का असर—विटामिन D और मूड दोनों प्रभावित
सर्दियों में सूरज देर से निकलता है और जल्दी ढल जाता है। धूप की कमी से न सिर्फ शरीर में विटामिन D का स्तर गिरता है, बल्कि सेरोटोनिन हॉर्मोन भी प्रभावित होता है, जो मूड और एनर्जी को नियंत्रित करता है।
सेरोटोनिन कम होने पर शरीर नींद और लेथार्जी को ज्यादा महसूस करता है। यही वजह है कि सर्दियों में अक्सर मूड डाउन होने, काम में मन न लगने और लगातार नींद आने की समस्या बढ़ जाती है। कई लोगों को यह सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर (SAD) के रूप में भी प्रभावित करता है।
भारी खाना भी नींद बढ़ाने का बड़ा कारण
सर्दियों में हम स्वाभाविक रूप से भारी और गर्माहट देने वाला भोजन ज्यादा खाते हैं—जैसे तिल, गुड़, मूंगफली, घी, आलू, गोभी, राजमा, चावल आदि। भारी भोजन को पचाने में शरीर को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
डाइजेशन में ब्लड का बड़ा हिस्सा पेट की तरफ चला जाता है, जिससे दिमाग रिलैक्स मोड में चला जाता है और नींद की इच्छा बढ़ जाती है। इसी कारण लोग दोपहर के खाने के बाद झपकी लेने लगते हैं और रात में जल्दी सोना चाहते हैं।
आखिर समाधान क्या है? आपकी पूरी विंटर स्लीप गाइड
सर्दियों में ज्यादा नींद आना स्वाभाविक है, लेकिन अगर यह आपकी दिनचर्या को प्रभावित कर रही है, तो नीचे दिए गए उपाय आपकी मदद करेंगे।
1. सुबह की धूप जरूर लें
ज्यादा से ज्यादा 10–15 मिनट धूप में बैठें। इससे सेरोटोनिन और विटामिन D दोनों को मदद मिलती है। इससे नींद और मूड दोनों बेहतर होते हैं।
2. सोने–जागने की टाइमिंग फिक्स रखें
सर्दियों में लोग अक्सर देर रात फोन देखते रहते हैं और सुबह देर से उठते हैं। अपनी बॉडी क्लॉक को रीसेट रखने के लिए रोज एक ही समय पर सोएं और उठें।
3. भारी भोजन और मीठा कम करें
डिनर हल्का रखें और सोने से 2–3 घंटे पहले खा लें। इससे पाचन आसान रहेगा और नींद सही आएगी।
4. कमरे का तापमान संतुलित रखें
बहुत ज्यादा गर्म या बहुत ठंडा कमरा नींद को प्रभावित करता है। कमरे का तापमान 18–22°C के बीच रखना बेहतर माना जाता है।
5. एक्सरसाइज को अपनी दिनचर्या में शामिल करें
सर्दियों में वर्कआउट कम हो जाता है, जिससे सुस्ती बढ़ती है। रोज 20–30 मिनट हल्की एक्सरसाइज, योग, वॉक या स्ट्रेचिंग करें।
6. सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करें
मोबाइल या टीवी की ब्लू लाइट मेलाटोनिन को दबाती है। इसलिए सोने से 30–40 मिनट पहले स्क्रीन से दूरी रखें।
निष्कर्ष
ठंड में ज्यादा नींद आना शरीर की स्वाभाविक प्रतिक्रिया है। बढ़ा हुआ मेलाटोनिन, कम धूप, लो टेम्परेचर और भारी भोजन—all मिलकर नींद को बढ़ाते हैं। यह खराब नहीं है, लेकिन सही दिनचर्या और थोड़े बदलाव से आप सर्दियों में भी एक्टिव और एनर्जेटिक रह सकते हैं।
Author: THE CG NEWS
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