
छत्तीसगढ़ में कांकेर जिले के आमाबेड़ा क्षेत्र में हुई हिंसा और कथित धर्मांतरण के विरोध में बुलाए गए छत्तीसगढ़ बंद का असर बुधवार को राज्यभर में देखने को मिला। राजधानी रायपुर से लेकर दुर्ग, जगदलपुर, बिलासपुर और सरगुजा संभाग तक सुबह से ही बाजार, दुकानें और कई व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे। हालांकि, कुछ जिलों में बंद का असर सीमित रहा। बंद के दौरान कई जगहों पर तनाव, तोड़फोड़ और मारपीट की घटनाएं सामने आईं, जिससे कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
रायपुर में हिंसक घटनाएं, मैग्नेटो मॉल में तोड़फोड़
राजधानी रायपुर में बंद के दौरान सबसे गंभीर घटनाएं सामने आईं। यहां बजरंग दल से जुड़े कुछ कार्यकर्ताओं पर आरोप है कि उन्होंने कटोरा तालाब इलाके में स्थित ब्लिंकिट के कार्यालय में घुसकर कर्मचारियों से मारपीट की। लाठी से हमला करते हुए एक व्यक्ति सीसीटीवी कैमरे में कैद हुआ है। बताया जा रहा है कि यह मारपीट डिलीवरी के दौरान हुई, जब कर्मचारी सामान लेकर बाहर निकल रहे थे।
इसी तरह रायपुर के प्रमुख शॉपिंग डेस्टिनेशन मैग्नेटो मॉल में भी हिंदू संगठनों से जुड़े लोगों ने तोड़फोड़ की। मॉल में क्रिसमस को लेकर की गई सजावट को नुकसान पहुंचाया गया। फूल, लाइट्स और डेकोरेशन का सामान फर्श पर बिखरा मिला। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ लोग लाठी-डंडों के साथ मॉल परिसर में घुसे और देखते ही देखते अफरा-तफरी मच गई। मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मी भीड़ को नियंत्रित करने में नाकाम रहे।
कांकेर में महिला का घर तोड़े जाने का आरोप
दूसरी ओर, कांकेर जिले के आमाबेड़ा क्षेत्र से एक और संवेदनशील मामला सामने आया। यहां उसेली गांव की एक धर्मांतरित महिला राम बाई तारम का घर तोड़ दिए जाने का आरोप है। महिला का कहना है कि वह पिछले 5–6 वर्षों से ईसाई धर्म को मान रही हैं और हिंदू धर्म में वापस लौटने को तैयार नहीं हैं। इसी बात को लेकर गांव के कुछ लोगों ने उनके घर में तोड़फोड़ की। महिला ने यह भी दावा किया कि उन्होंने बीमारी के इलाज के दौरान धर्म परिवर्तन किया था और अब उन पर दबाव बनाया जा रहा है।
इस घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल बन गया है। पुलिस-प्रशासन ने इलाके में अतिरिक्त बल तैनात किया है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और दोषियों पर कार्रवाई होगी।
राज्यभर में बंद का असर, लेकिन हर जगह नहीं
छत्तीसगढ़ बंद का असर दुर्ग, बिलासपुर, जगदलपुर, अंबिकापुर, जांजगीर-चांपा, बालोद और धमतरी जैसे जिलों में व्यापक रूप से देखने को मिला। सुबह से ही स्कूल, दुकानें, बाजार और कई निजी संस्थान बंद रहे। धमतरी में शराब दुकानों के शटर गिराए गए और तहसील कार्यालय के बाहर प्रदर्शन हुआ। जगदलपुर में कुछ दुकानदारों और बंद समर्थकों के बीच तीखी बहस भी हुई, हालांकि बाद में दुकानें बंद करा दी गईं।
वहीं दूसरी ओर, मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर (MCB) जिले और बलरामपुर–रामानुजगंज में बंद का खास असर नहीं दिखा। इन इलाकों में दुकानें और बाजार सामान्य रूप से खुले रहे, जिससे यह साफ हुआ कि बंद को हर जगह समान समर्थन नहीं मिला।
RSS और व्यापारिक संगठनों का समर्थन
इस बंद को RSS, छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स और कई सामाजिक व धार्मिक संगठनों का समर्थन मिला। चैंबर ऑफ कॉमर्स के सदस्य कई शहरों में सड़कों पर उतरकर व्यापारियों से दुकानें बंद रखने की अपील करते नजर आए। हालांकि, कई जगहों पर यह अपील विवाद में बदलती दिखी, जहां बंद समर्थकों और दुकानदारों के बीच बहस हुई।
प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर सवाल
बंद और हिंसा की घटनाओं के बीच प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। एक दिन पहले रायपुर प्रेस क्लब में आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता में कई समाज प्रमुखों ने सरकार और प्रशासन पर निष्पक्ष कार्रवाई न करने के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि आमाबेड़ा में हुई हिंसा में आदिवासी समाज को निशाना बनाया गया, लेकिन प्रशासन ने समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए।
समाज प्रमुखों ने मांग की कि कांकेर के पुलिस अधीक्षक को निलंबित कर उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, साथ ही कुछ अन्य अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो। इसके अलावा, कथित पक्षपातपूर्ण मामलों को वापस लेने और पीड़ितों को मुआवजा देने की मांग भी रखी गई।
आमाबेड़ा हिंसा की पृष्ठभूमि
कांकेर जिले के आमाबेड़ा क्षेत्र में विवाद की शुरुआत 19 दिसंबर को हुई थी। बड़े तेवड़ा गांव में शव दफनाने को लेकर आदिवासी और धर्मांतरित समुदाय के बीच हिंसक झड़प हो गई थी। आरोप है कि एक धर्मांतरित परिवार ने गांव में ही शव दफनाया, जिससे ग्रामीण आक्रोशित हो गए। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच मारपीट हुई, हालात बिगड़े और चर्चों में आगजनी की घटनाएं भी सामने आईं।
घटना के दौरान पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा, जिसमें कई ग्रामीणों के साथ-साथ पत्रकार और पुलिसकर्मी भी घायल हुए। हालात को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा था।
राजनीतिक और सामाजिक असर
छत्तीसगढ़ बंद और उससे जुड़ी हिंसक घटनाओं ने राज्य की राजनीति और सामाजिक ताने-बाने पर गहरा असर डाला है। एक तरफ जहां कुछ संगठन इसे धर्मांतरण के खिलाफ जनभावना बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिंसा और जबरदस्ती बंद कराने की निंदा की है। उनका कहना है कि विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन कानून हाथ में लेना किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है।
आगे की राह
प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती हालात को सामान्य करना और दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई करना है। पुलिस ने रायपुर में ब्लिंकिट कार्यालय में मारपीट और मैग्नेटो मॉल में तोड़फोड़ की घटनाओं की जांच शुरू कर दी है। कांकेर में महिला के घर तोड़े जाने के मामले में भी जांच के आदेश दिए गए हैं।
छत्तीसगढ़ बंद ने यह साफ कर दिया है कि आमाबेड़ा की घटना केवल एक स्थानीय विवाद नहीं रही, बल्कि उसने पूरे राज्य में सामाजिक और राजनीतिक उबाल पैदा कर दिया है। आने वाले दिनों में सरकार और प्रशासन के कदम यह तय करेंगे कि यह तनाव शांत होता है या और गहराता है।
Author: THE CG NEWS
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