
चार साल में पहली बार यूक्रेन, रूस और अमेरिका एक ही मंच पर, जमीन और सुरक्षा गारंटी पर टकराव बरकरार
यूक्रेन-रूस युद्ध को समाप्त करने की कोशिशों के तहत आज यानी शुक्रवार को अबू धाबी में एक अहम त्रिपक्षीय बैठक होने जा रही है। इस बैठक में यूक्रेन, रूस और अमेरिका के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर हमले के बाद पहली बार है जब तीनों देश एक ही मंच पर आमने-सामने बातचीत करेंगे। बैठक दो दिन तक चलने वाली है और इसे युद्ध खत्म करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल माना जा रहा है।
पुतिन से मुलाकात के बाद तय हुई बैठक
ब्रिटिश अखबार द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार, इस त्रिपक्षीय वार्ता की जमीन गुरुवार को उस समय तैयार हुई, जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशर ने मुलाकात की। इस बातचीत के बाद ही अबू धाबी में संयुक्त बैठक पर सहमति बनी। रूसी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सैन्य खुफिया एजेंसी के निदेशक जनरल इगोर कोस्ट्यूकोव करेंगे। हालांकि, बैठक का पूरा एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है और यह भी स्पष्ट नहीं है कि यूक्रेनी और रूसी अधिकारी सीधे एक-दूसरे से बातचीत करेंगे या मध्यस्थों के जरिए चर्चा होगी।
जमीन का मुद्दा सबसे बड़ा रोड़ा
इस वार्ता में सबसे बड़ा और जटिल मुद्दा जमीन को लेकर है। रूस फिलहाल यूक्रेन के करीब 20 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा किए हुए है। इनमें डोनबास क्षेत्र के डोनेट्स्क और लुहांस्क के अलावा क्रीमिया, खेरसॉन और जापोरिज्जिया जैसे इलाके शामिल हैं। रूस की मांग है कि यूक्रेन डोनेट्स्क क्षेत्र का वह हिस्सा भी छोड़ दे जिस पर अब भी कीव का नियंत्रण है और मौजूदा कब्जे को आधिकारिक रूप से मान्यता दे। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इस मांग को साफ तौर पर खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि 2022 से भारी नुकसान झेलने के बावजूद जिस जमीन की रक्षा यूक्रेन ने की है, उसे छोड़ा नहीं जाएगा।
सुरक्षा गारंटी पर अमेरिका की भूमिका अहम
यूक्रेन के लिए दूसरा बड़ा मुद्दा सुरक्षा गारंटी का है। जेलेंस्की लंबे समय से अमेरिका से ठोस सुरक्षा आश्वासन की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में रूस दोबारा हमला न कर सके। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, जेलेंस्की ने बताया है कि सुरक्षा गारंटी से जुड़े दस्तावेज तैयार हो चुके हैं और अब केवल हस्ताक्षर तथा दोनों देशों की संसदों की मंजूरी बाकी है। उन्होंने यूक्रेन की हवाई सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त मिसाइलों की भी मांग रखी है। इस संदर्भ में अमेरिका की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है।
नाटो को लेकर पुतिन की सख्त शर्त
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बार-बार यह स्पष्ट कर चुके हैं कि युद्ध समाप्त करने की उनकी सबसे अहम शर्त यूक्रेन का नाटो में शामिल न होना है। पुतिन का कहना है कि अगर उन्हें यह भरोसा मिल जाए कि यूक्रेन भविष्य में नाटो का सदस्य नहीं बनेगा और उसके क्षेत्र में नाटो सैनिक तैनात नहीं होंगे, तो वह बाकी मुद्दों पर समझौते के लिए तैयार हो सकते हैं। पुतिन ने यह संकेत भी दिया है कि यदि डोनेट्स्क को लेकर उनकी मांग मान ली जाती है, तो वह खेरसॉन और जापोरिज्जिया में अपने मोर्चों को स्थिर कर देंगे और वहां आगे विस्तार नहीं करेंगे।
ट्रम्प-जेलेंस्की की अहम मुलाकात
इन घटनाक्रमों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को दावोस में जेलेंस्की से करीब एक घंटे तक बंद कमरे में बातचीत की। बैठक के बाद ट्रम्प ने कहा कि पुतिन के लिए उनका साफ संदेश है कि यूक्रेन में जंग खत्म होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जेलेंस्की के साथ बातचीत सकारात्मक रही, हालांकि किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसका ब्योरा नहीं दिया। ट्रम्प ने यह संकेत जरूर दिया कि शांति समझौता अब पहले से कहीं ज्यादा करीब है।
तीन साल से जारी युद्ध, भारी मानवीय नुकसान
रूस-यूक्रेन युद्ध फरवरी 2022 में शुरू हुआ था और तब से अब तक हजारों सैनिक और नागरिक मारे जा चुके हैं। युद्ध के चलते यूक्रेन में बड़े पैमाने पर तबाही हुई है और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। जून 2023 तक करीब 80 लाख यूक्रेनियन देश छोड़कर अन्य देशों में शरण लेने को मजबूर हुए। रूस इन क्षेत्रों को अपनी सामरिक और ऐतिहासिक धरोहर मानता है और इन्हें छोड़ने को तैयार नहीं है, जबकि यूक्रेन अपनी संप्रभुता से किसी भी तरह का समझौता करने के पक्ष में नहीं है।
अबू धाबी में होने वाली यह त्रिपक्षीय वार्ता इसी टकराव के बीच एक नई उम्मीद लेकर आई है। हालांकि, जमीन, नाटो सदस्यता और सुरक्षा गारंटी जैसे मुद्दों पर मतभेद इतने गहरे हैं कि किसी ठोस नतीजे तक पहुंचना आसान नहीं होगा। फिर भी चार साल में पहली बार तीनों देशों का एक साथ बैठना अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से एक बड़ा और निर्णायक कदम माना जा रहा है।
Author: THE CG NEWS
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