
देश ने नया उपराष्ट्रपति चुन लिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन ने मंगलवार को भारत के 15वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। उन्होंने राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के समक्ष पद की शपथ ग्रहण की। राधाकृष्णन का कार्यकाल संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार पांच वर्षों का होगा और माना जा रहा है कि वे सितंबर 2030 तक इस पद पर बने रहेंगे। यह चुनाव विशेष रूप से इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों से जुलाई में इस्तीफ़ा दिया था और पद रिक्त होने के 53 दिन बाद नए उपराष्ट्रपति का चुनाव संपन्न हुआ।
चुनाव में मिली बड़ी जीत
9 सितंबर 2025 को संपन्न उपराष्ट्रपतीय चुनाव में राधाकृष्णन ने विपक्षी उम्मीदवार न्यायमूर्ति बी. सुदर्शन रेड्डी को कड़े मुकाबले में हराया। निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित नतीजों के अनुसार राधाकृष्णन को कुल 452 वोट मिले, जबकि रेड्डी को 300 वोट हासिल हुए। कुल 767 सांसदों ने मतदान किया, जिनमें से कुछ वोट अमान्य घोषित हुए। इस जीत ने एनडीए को संसद में मजबूती दी और भाजपा नेतृत्व के प्रति सांसदों के विश्वास को भी प्रदर्शित किया।
शपथ समारोह में राजनीतिक हस्तियों की मौजूदगी
12 सितंबर 2025 को आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में देश की शीर्ष राजनीतिक हस्तियां मौजूद रहीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्रिमंडल के कई वरिष्ठ मंत्री, विपक्षी नेताओं और राज्यपालों ने भी समारोह में शिरकत की। पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी इस अवसर पर उपस्थित रहे और उन्होंने अपने उत्तराधिकारी को शुभकामनाएं दीं। समारोह में राज्यसभा सचिवालय के अधिकारी और न्यायपालिका के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
राजनीतिक सफर और अनुभव
राधाकृष्णन का जन्म 4 मई 1957 को तमिलनाडु के तिरुपुर में हुआ। वे लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी से जुड़े रहे हैं और संगठन में कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा चुके हैं। वे दो बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं, जहां उन्होंने कोयम्बटूर सीट से जीत दर्ज की थी। इसके अलावा वे झारखंड और तेलंगाना सहित कई राज्यों के राज्यपाल पद पर भी रह चुके हैं। महाराष्ट्र के राज्यपाल रहते हुए उन्होंने कई संवैधानिक और प्रशासनिक फैसले लिए, जिससे उनकी पहचान एक संतुलित और अनुभवशील नेता के रूप में बनी। यही वजह रही कि भाजपा ने उन्हें उपराष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाया और एनडीए ने एकजुट होकर उनका समर्थन किया।
संवैधानिक जिम्मेदारियाँ और चुनौतियाँ
भारत का उपराष्ट्रपति पद न केवल औपचारिक है बल्कि संसदीय प्रणाली में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उपराष्ट्रपति राज्यसभा के सभापति होते हैं और सदन की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाना उनकी जिम्मेदारी होती है। मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में, जहां विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक अक्सर देखने को मिलती है, राधाकृष्णन के सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्यसभा को सुचारु ढंग से संचालित करने की होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि उनका अनुभव और शांत स्वभाव इस पद के लिए उन्हें उपयुक्त बनाता है।
जगदीप धनखड़ के इस्तीफ़े के बाद बनी स्थिति
पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने जुलाई 2025 में स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफ़ा देकर देश को चौंका दिया था। उनके इस्तीफ़े के बाद यह संवैधानिक पद खाली हो गया। संविधान के अनुसार, उपराष्ट्रपति का चुनाव छह महीने के भीतर कराना अनिवार्य है। हालांकि, राजनीतिक सहमति और प्रक्रिया पूरी करने में लगभग दो महीने का समय लगा। अंततः सितंबर की शुरुआत में चुनाव हुआ और परिणाम आने के बाद राधाकृष्णन ने पदभार संभाला। धनखड़ शपथ समारोह में शामिल हुए और उन्होंने कहा कि वे नए उपराष्ट्रपति से देश को ऊंचाइयों पर ले जाने की उम्मीद रखते हैं।
आगे की राह
सी.पी. राधाकृष्णन के उपराष्ट्रपति बनने से भाजपा और एनडीए को बड़ी राजनीतिक सफलता मिली है। यह जीत दक्षिण भारत में भाजपा की सियासी पकड़ मजबूत करने की दिशा में भी एक संकेत मानी जा रही है। अगले पांच वर्षों में राधाकृष्णन न केवल राज्यसभा के संचालन बल्कि संवैधानिक संस्थाओं के साथ तालमेल और लोकतांत्रिक परंपराओं को आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
Author: THE CG NEWS
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