सर्दियों में रूम हीटर से बढ़ रहा मौत का खतरा: डॉक्टरों ने बताया क्यों जरूरी है सुरक्षा, 12 प्रमुख सावधानियों पर खास जोर

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सर्दियां शुरू होते ही शहरों और कस्बों में रूम हीटर की मांग तेजी से बढ़ जाती है, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि इनका गलत इस्तेमाल जानलेवा साबित हो सकता है। हर साल देशभर में ठंड के मौसम में कई मामले सामने आते हैं, जिनमें लोग बंद कमरों में हीटर चलाकर सो जाते हैं और कार्बन मोनोक्साइड या धुएं की वजह से दम घुटने से मौत हो जाती है। डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार हीटर जितने जरूरी हैं, उतना ही जरूरी है इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल करना। हाल के दिनों में कई राज्यों में तापमान लगातार गिरा है, ऐसे में परिवारों को सुरक्षित हीटिंग की ओर ध्यान देना होगा, क्योंकि छोटी–सी लापरवाही भारी खतरा पैदा कर सकती है।

भारत के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों और आपातकालीन विभागों के डॉक्टरों ने सर्दी के मौसम में हीटर से जुड़े खतरे पर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि लोग अक्सर यह मान लेते हैं कि हीटर पूरी तरह सुरक्षित है, लेकिन मौसम विशेषज्ञों की तरह स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी चेतावनी दे रहे हैं कि कमरे में वेंटिलेशन का अभाव, हीटर का लंबे समय तक चलना, और पुराने या खराब उपकरणों का उपयोग ही सबसे बड़ा जोखिम है। खासकर बुजुर्ग, छोटे बच्चे और दमा या हृदय रोग से पीड़ित लोग इस जोखिम से अधिक प्रभावित होते हैं, क्योंकि उनका शरीर ऑक्सीजन की कमी को लंबे समय तक सहन नहीं कर पाता।

डॉक्टरों का कहना है कि रूम हीटर कार्बन मोनोक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड जैसी गैसें पैदा कर सकते हैं। यह गैसें रंगहीन और गंधहीन होती हैं, इसलिए व्यक्ति को पता भी नहीं चलता कि वह धीरे–धीरे जहरीली हवा में सांस ले रहा है। ऐसे में चक्कर आना, सिरदर्द, उलझन, नींद में भारीपन, और कई बार दिल की धड़कनें तेज होने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। कई मामले ऐसे भी आए हैं जहां लोग सोते समय इन गैसों के संपर्क में आकर दूसरी सुबह प्रतिक्रिया नहीं देते। डॉक्टर बताते हैं कि ठंड में खिड़कियां बंद कर लेना और हीटर को लगातार चलने देना सबसे ज्यादा जोखिम वाला संयोजन है, जो कमरे में ऑक्सीजन कम कर देता है और कार्बन मोनोक्साइड का स्तर बढ़ा देता है।

हीटर से होने वाली दुर्घटनाएं सिर्फ दम घुटने तक सीमित नहीं हैं। फायर डिपार्टमेंट के आंकड़े बताते हैं कि हर साल सैकड़ों आग की घटनाएं हीटर की वजह से होती हैं, खासकर ग्रामीण और मध्यम वर्गीय इलाकों में जहां पुराने इलेक्ट्रिक हीटर, ब्लोअर या कॉइल हीटर का ज्यादा उपयोग होता है। ढीले तार, ओवरलोडेड सॉकेट, और ज्वलनशील कपड़ों के पास हीटर रखना आग लगने का बड़ा कारण बनता है। विशेषज्ञों का कहना है कि हीटर को हमेशा एक सुरक्षित दूरी पर रखना चाहिए, ताकि पर्दे, कंबल, रजाई या लकड़ी के फर्नीचर हीटर की सीधी गर्मी के संपर्क में न आएं। सर्दियों में अचानक बढ़ी आग की घटनाओं का बड़ा कारण इलेक्ट्रिक हीटिंग अप्लायंसेज ही माने जाते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव देते हैं, और इन सुझावों को केवल जानना ही नहीं बल्कि अपनाना भी जरूरी है। डॉक्टरों के अनुसार, कमरे में थोड़ी–सी हवा के लिए वेंटिलेशन छोड़ना, खिड़की या दरवाजे में हल्का–सा गैप रखना, और हीटर को कभी भी पूरी रात चालू न रखना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि छोटे कमरे में बंद दरवाजे के साथ हीटर चालू रखने से कार्बन मोनोक्साइड का स्तर तेजी से बढ़ सकता है, जो शरीर के लिए घातक है। इसके अलावा, डॉक्टर लोगों को यह भी सलाह देते हैं कि हीटर का उपयोग करते समय नियमित रूप से कमरे से बाहर निकलकर ताजी हवा लें, खासकर जब हीटर ब्लोअर या रॉड वाला हो।

इलेक्ट्रिकल सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि हीटर हमेशा सही रेटिंग वाले सॉकेट में ही लगाना चाहिए और एक्सटेंशन बोर्ड में चलाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे ओवरहीटिंग और शॉर्ट–सर्किट का खतरा बढ़ता है। किसी भी हीटर को उपयोग करने से पहले उसकी वायरिंग और प्लग की जांच करना जरूरी है। पुराने हीटरों में खराबी होना आम बात है, इसलिए यदि कॉइल काली हो गई हो या प्लग ढीला लगता हो, तो हीटर को बदल देना ही सुरक्षित विकल्प है।

बच्चों और पालतू जानवरों की मौजूदगी में हीटर का इस्तेमाल और ज्यादा सावधानी की मांग करता है, क्योंकि छोटे बच्चे अनजाने में हीटर के पास जा सकते हैं और खुद को जला सकते हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि हीटर को ऐसी जगह रखा जाए जहां बच्चों की पहुंच न हो और हीटर के सामने सुरक्षा ग्रिल जरूर लगी हो। कई आधुनिक हीटरों में ‘ऑटो कट–ऑफ’ और ‘टिप–ओवर प्रोटेक्शन’ जैसे फीचर होते हैं, जो गिरने या ओवरहीट होने पर हीटर को अपने–आप बंद कर देते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे फीचर्स वाले हीटर ही अधिक सुरक्षित हैं और लोगों को इन्हें प्राथमिकता देनी चाहिए।

लंबे समय तक रूम हीटर के इस्तेमाल से त्वचा संबंधी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। त्वचा रोग विशेषज्ञ बताते हैं कि हीटर से निकलने वाली सूखी गर्मी स्किन की नैचुरल नमी को कम कर देती है, जिससे खुजली, रूखापन और पपड़ी जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। इसलिए हीटर का इस्तेमाल करते समय मॉइश्चराइज़र का उपयोग और पर्याप्त पानी पीना भी बहुत जरूरी है, ताकि शरीर में हाइड्रेशन बना रहे और त्वचा सुरक्षित रहे।

सर्दी के बढ़ते प्रकोप के बीच हीटर जरूरी हैं लेकिन डॉक्टरों और विशेषज्ञों की सलाह स्पष्ट हैहीटर का उपयोग समझदारी और सावधानी के साथ होना चाहिए। थोड़ीसी जागरूकता, सही वेंटिलेशन, सुरक्षित इलेक्ट्रिकल सिस्टम और आधुनिक फीचर्स वाले हीटर चुनने से न केवल दुर्घटनाएं टाली जा सकती हैं, बल्कि परिवार की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकती है। जैसेजैसे तापमान गिर रहा है, वैसेवैसे इन सावधानियों को अपनाना आने वाले महीनों में स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा।

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Author: THE CG NEWS

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