ईरान-इजराइल युद्ध से भारत की तेल आपूर्ति और व्यापार पर खतरा: होर्मुज स्ट्रेट बंद हुआ तो बढ़ सकती है महंगाई

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50% कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा, सोना-चांदी महंगा और शेयर बाजार में गिरावट की आशंका

ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारत पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह संघर्ष और बढ़ता है तथा होर्मुज स्ट्रेट जैसे अहम समुद्री मार्ग को बंद किया जाता है, तो भारत की तेल आपूर्ति, निर्यात और वित्तीय बाजारों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात करता है और इसका अधिकांश हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर आता है।

भारत की 50% तेल सप्लाई पर खतरा

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयातित कच्चे तेल पर काफी हद तक निर्भर है। आंकड़ों के अनुसार, भारत हर दिन लगभग 26 लाख बैरल कच्चा तेल होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आयात करता है। जनवरी-फरवरी 2026 में भारत के कुल तेल आयात का करीब 50% हिस्सा इसी मार्ग से आया था। इससे पहले नवंबर-दिसंबर 2025 में यह आंकड़ा लगभग 40% था।

होर्मुज स्ट्रेट ईरान और ओमान के बीच स्थित एक संकरा लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत और यूएई जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों से भारत को होने वाली आपूर्ति इसी मार्ग से गुजरती है। यदि युद्ध के कारण यह मार्ग बाधित होता है, तो भारत को तेल आपूर्ति में गंभीर व्यवधान का सामना करना पड़ सकता है।

गैर-तेल निर्यात पर भी असर की आशंका

सिर्फ तेल ही नहीं, बल्कि भारत के गैर-तेल निर्यात पर भी इसका असर पड़ सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत के कुल नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट का 10% से अधिक हिस्सा इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है। भारत खाड़ी देशों को बासमती चावल, चाय, मसाले, फल-सब्जियां और इंजीनियरिंग उत्पाद बड़ी मात्रा में निर्यात करता है।

हाल के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने खाड़ी देशों को करीब 47.6 अरब डॉलर का गैर-तेल निर्यात किया, जो कुल 360 अरब डॉलर के नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट का लगभग 13% है। यदि समुद्री मार्ग बाधित होता है या माल ढुलाई महंगी होती है, तो भारतीय निर्यातकों की लागत बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है।

कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से महंगाई का खतरा

कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। तेल महंगा होने से पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे परिवहन लागत बढ़ेगी। इसका असर खाद्य पदार्थों, उपभोक्ता वस्तुओं और अन्य जरूरी सामानों की कीमतों पर पड़ेगा। इससे खुदरा महंगाई दर में बढ़ोतरी की संभावना है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ब्रेंट क्रूड की कीमत 80 से 85 डॉलर प्रति बैरल के पार जाती है, तो इसका असर भारत के वित्तीय बाजारों पर भी दिखाई देगा। तेल पर निर्भर उद्योगों जैसे एविएशन, लॉजिस्टिक्स, पेंट और टायर सेक्टर की लागत बढ़ेगी और मुनाफा प्रभावित हो सकता है।

शेयर बाजार में गिरावट और निवेशकों की चिंता

वैश्विक तनाव की स्थिति में निवेशक आमतौर पर जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाते हैं। इसका असर शेयर बाजार पर बिकवाली के रूप में दिख सकता है। विदेशी निवेशक पहले से ही भारतीय बाजार से निवेश निकाल रहे हैं, ऐसे में युद्ध की स्थिति बाजार की अस्थिरता बढ़ा सकती है।

सोना-चांदी में निवेश बढ़ने की संभावना

अनिश्चितता और युद्ध की स्थिति में निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हैं। सोना और चांदी को पारंपरिक रूप से सुरक्षित निवेश माना जाता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि युद्ध की स्थिति लंबी खिंचने पर इन धातुओं की कीमतों में और तेजी आ सकती है।

हाल के कारोबार में सोने और चांदी की कीमतों में पहले ही वृद्धि देखी गई है। निवेशकों की बढ़ती मांग के कारण आने वाले समय में इनकी कीमतों में और उछाल संभव है।

वैकल्पिक मार्गों पर विचार संभव

यदि होर्मुज स्ट्रेट बाधित होता है, तो भारत को वैकल्पिक मार्गों पर निर्भर रहना पड़ सकता है। इसमें सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन और यूएई की अबू धाबी पाइपलाइन शामिल हैं, जो होर्मुज मार्ग से बचते हुए तेल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई हैं। हालांकि इनकी क्षमता सीमित है और पूरी आपूर्ति को संभालना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

विशेषज्ञों की सलाह: स्थिति पर नजर जरूरी

अर्थशास्त्रियों और बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए रखना जरूरी है। यदि संघर्ष सीमित रहता है, तो बाजार जल्द स्थिर हो सकता है। लेकिन यदि होर्मुज स्ट्रेट प्रभावित होता है, तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और भारत की अर्थव्यवस्था पर लंबे समय तक रह सकता है।

कुल मिलाकर, ईरानइजराइल युद्ध केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों पर भी पड़ सकता है। आने वाले दिनों में इस संकट की दिशा भारत की आर्थिक स्थिति के लिए अहम साबित होगी।

THE CG NEWS
Author: THE CG NEWS

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