
रंगों के त्योहार होली में मस्ती, धूप, शोर और खानपान का खास माहौल होता है। लेकिन कई लोगों के लिए त्योहार के अगले दिन तेज सिरदर्द या माइग्रेन का अटैक परेशानी का कारण बन जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि होली के दौरान बदली दिनचर्या, तेज आवाज, धूप, डिहाइड्रेशन और कुछ खाद्य पदार्थ सिरदर्द को ट्रिगर कर सकते हैं। खासतौर पर माइग्रेन से पीड़ित लोगों को इन कारणों को समझना और पहले से सावधानी बरतना जरूरी है।
धूप और डिहाइड्रेशन बड़ा कारण
होली आमतौर पर दिन में खुले मैदान या सड़कों पर खेली जाती है। लंबे समय तक धूप में रहने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है। डिहाइड्रेशन दिमाग की रक्त वाहिकाओं पर असर डालता है, जिससे सिरदर्द या माइग्रेन ट्रिगर हो सकता है। न्यूरोलॉजिस्ट बताते हैं कि माइग्रेन मरीजों में पानी की कमी एक प्रमुख ट्रिगर फैक्टर है। त्योहार के उत्साह में लोग पर्याप्त पानी नहीं पीते, जिससे समस्या बढ़ सकती है।
तेज शोर और नींद की कमी
होली के दौरान डीजे, ढोल और तेज संगीत आम बात है। तेज आवाज संवेदनशील लोगों में सिरदर्द को बढ़ा सकती है। माइग्रेन मरीजों में साउंड सेंसिटिविटी (फोनोफोबिया) एक सामान्य लक्षण है। इसके अलावा त्योहार की तैयारियों और देर रात तक चलने वाले कार्यक्रमों से नींद की कमी हो जाती है। नींद का पैटर्न बिगड़ने से भी माइग्रेन अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
रंगों में मौजूद केमिकल्स का असर
बाजार में मिलने वाले कई रंगों में केमिकल्स होते हैं, जिनकी गंध या त्वचा के संपर्क से एलर्जी और सिरदर्द हो सकता है। तेज गंध दिमाग के ट्राइजेमिनल नर्व को उत्तेजित कर सकती है, जो माइग्रेन से जुड़ी होती है। कुछ लोगों को रंगों के संपर्क में आने से आंखों में जलन और साइनस की समस्या भी हो सकती है, जो आगे चलकर सिरदर्द में बदल जाती है।
खानपान में बदलाव और ट्रिगर फूड
होली पर गुझिया, मिठाइयां, ठंडाई और तली-भुनी चीजों का सेवन ज्यादा होता है। ज्यादा शक्कर, डिहाइड्रेशन और कभी-कभी अल्कोहल का सेवन भी माइग्रेन ट्रिगर कर सकता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि कुछ लोगों में चॉकलेट, प्रोसेस्ड फूड या ज्यादा मसालेदार भोजन सिरदर्द की वजह बन सकते हैं। ब्लड शुगर लेवल में अचानक बदलाव भी सिरदर्द को बढ़ा सकता है।
अल्कोहल और सिरदर्द का संबंध
होली पर कई लोग भांग या शराब का सेवन करते हैं। अल्कोहल शरीर में पानी की कमी करता है और रक्त वाहिकाओं को फैलाता है, जिससे सिरदर्द की संभावना बढ़ जाती है। माइग्रेन मरीजों में अल्कोहल एक ज्ञात ट्रिगर है। त्योहार के अगले दिन ‘हैंगओवर हेडेक’ और माइग्रेन का फर्क समझना भी जरूरी है, क्योंकि दोनों के लक्षण मिलते-जुलते हो सकते हैं।
माइग्रेन मरीज क्या करें?
डॉक्टर सलाह देते हैं कि माइग्रेन से पीड़ित लोग त्योहार से पहले और दौरान कुछ सावधानियां अपनाएं। पर्याप्त पानी पीना, धूप में ज्यादा देर न रहना और समय पर भोजन करना जरूरी है। तेज शोर से बचने के लिए कानों में प्लग का इस्तेमाल किया जा सकता है। यदि किसी को माइग्रेन की दवा नियमित रूप से लेनी होती है तो उसे डॉक्टर की सलाह अनुसार जारी रखें।
यदि होली के बाद सिरदर्द 24 घंटे से ज्यादा बना रहे, उल्टी, तेज रोशनी से परेशानी या दृष्टि में बदलाव जैसे लक्षण हों, तो तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।
होली का आनंद तभी पूरा होता है जब स्वास्थ्य सुरक्षित रहे। थोड़ी सी सतर्कता और संतुलन से सिरदर्द और माइग्रेन की परेशानी से बचा जा सकता है।
Author: THE CG NEWS
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