
देश और दुनिया में बढ़ती ऊर्जा चुनौतियों के बीच महाराष्ट्र के शिर्डी स्थित श्री साईंबाबा संस्थान ट्रस्ट का सोलर कुकिंग सिस्टम एक अनोखी और प्रेरणादायक पहल के रूप में सामने आया है। सौर ऊर्जा से संचालित इस आधुनिक किचन के माध्यम से रोजाना हजारों श्रद्धालुओं के लिए भोजन तैयार किया जा रहा है। इस प्रणाली के जरिए न केवल बड़ी मात्रा में गैस की बचत हो रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान मिल रहा है। यही कारण है कि केंद्र सरकार के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने इस परियोजना को देश के लिए एक यूनिक मॉडल बताया है।
शिर्डी में हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु साईं बाबा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। औसतन 75 से 80 हजार श्रद्धालु प्रतिदिन शिर्डी आते हैं। इनमें से बड़ी संख्या में लोग साईं संस्थान के प्रसादालय में मिलने वाले मुफ्त भोजन का लाभ उठाते हैं। प्रसादालय में रोज लगभग 40 हजार श्रद्धालुओं को भोजन कराया जाता है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के लिए भोजन तैयार करना पहले काफी चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि इसके लिए बड़ी मात्रा में एलपीजी गैस का इस्तेमाल करना पड़ता था।
सौर ऊर्जा से पक रहा हजारों लोगों का भोजन
साईं संस्थान ने इस समस्या का समाधान सौर ऊर्जा के रूप में खोजा। प्रसादालय परिसर में स्थापित सोलर कुकिंग सिस्टम के माध्यम से रोज करीब 2,000 किलो भोजन तैयार किया जाता है, जो लगभग 40 हजार श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त होता है। इस व्यवस्था से प्रतिदिन करीब 200 किलो एलपीजी गैस की बचत हो रही है।
पहले इतनी बड़ी मात्रा में भोजन पकाने के लिए लगभग 1,700 किलो गैस की जरूरत पड़ती थी, जिससे संस्थान पर आर्थिक बोझ भी बढ़ता था। लेकिन सोलर कुकिंग सिस्टम शुरू होने के बाद गैस की खपत में काफी कमी आई है। इससे संस्थान को आर्थिक बचत के साथ-साथ ऊर्जा संरक्षण का भी लाभ मिल रहा है।
2009 में शुरू हुई थी सोलर कुकिंग प्रणाली
ऊर्जा बचत और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए साईं संस्थान के ट्रस्टी मंडल ने वर्ष 2009 में सोलर कुकिंग सिस्टम लगाने का निर्णय लिया था। इस परियोजना पर लगभग 1 करोड़ 37 लाख रुपये का खर्च किया गया था। प्रसादालय परिसर में कुल 73 सोलर डिश स्थापित की गईं, जो सूर्य की किरणों को एकत्र कर सोलर कुकर तक ऊर्जा पहुंचाती हैं।
इन सोलर डिश की मदद से बड़े-बड़े कुकर में भोजन पकाया जाता है। सूर्य की ऊर्जा से भोजन पकाने की यह प्रणाली पर्यावरण के लिए पूरी तरह सुरक्षित और ऊर्जा की दृष्टि से अत्यंत प्रभावी मानी जा रही है। इसी कारण यह परियोजना देश के अन्य धार्मिक स्थलों और संस्थानों के लिए भी प्रेरणा बनती जा रही है।
बड़े कुकर में तैयार होता है विशाल भोजन
प्रसादालय में भोजन तैयार करने के लिए 150 लीटर क्षमता के 10 बड़े कुकर लगाए गए हैं। इन कुकरों की मदद से एक समय में लगभग 15 क्विंटल चावल, 5 क्विंटल दाल और 5 क्विंटल सब्जी पकाई जा सकती है। इतनी बड़ी मात्रा में भोजन तैयार होने से हजारों श्रद्धालुओं को समय पर भोजन उपलब्ध कराया जा सकता है।
सोलर कुकिंग सिस्टम के जरिए भोजन पकाने की प्रक्रिया न केवल ऊर्जा की बचत करती है, बल्कि इससे खाना पकाने में लगने वाला समय भी काफी हद तक कम हो जाता है। यही वजह है कि यह प्रणाली बड़े स्तर पर भोजन बनाने के लिए काफी प्रभावी साबित हो रही है।
लाखों किलो गैस की बचत, करोड़ों की आर्थिक लाभ
साल 2009 से लेकर 2026 तक इस सोलर कुकिंग सिस्टम के कारण संस्थान को भारी आर्थिक और ऊर्जा लाभ मिला है। इस अवधि में करीब दो लाख किलो से अधिक गैस की बचत हो चुकी है। इससे साईं संस्थान को दो करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक बचत भी हुई है।
इसके अलावा साईं संस्थान ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सौर ऊर्जा से गर्म पानी की व्यवस्था भी शुरू की है। नए श्रद्धालु निवास, द्वारावती और साईं आश्रम जैसे स्थानों पर रोजाना 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को 24 घंटे मुफ्त गर्म पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।
सरकार ने बताया देश के लिए प्रेरणादायक मॉडल
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने शिर्डी के इस सोलर किचन प्रोजेक्ट को देश के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बड़े धार्मिक स्थल, संस्थान और सामुदायिक रसोई इस तरह की सौर ऊर्जा आधारित प्रणालियों को अपनाएं, तो इससे ऊर्जा की बचत के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बड़ा लाभ मिल सकता है।
इस पहल के जरिए शिर्डी साईं संस्थान ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक तकनीक और पारंपरिक सेवा भावना का मेल समाज और पर्यावरण दोनों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।
Author: THE CG NEWS
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