CBSE ने प्राइवेट छात्रों के लिए ‘एडिशनल सब्जेक्ट’ विकल्प हटाया: 2026 बोर्ड परीक्षा में करीब दो लाख छात्र प्रभावित

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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 2026 की कक्षा 10वीं एवं 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के लिए एक अहम बदलाव किया है। अब प्राइवेट कैंडिडेट्स (जो स्कूल में नामांकित नहीं हैं या “ड्रोपर” स्टेटस पर हैं) सरल रूप से एडिशनल विषय (Additional Subject) नहीं चुन सकेंगे। यह कदम अचानक लिया गया है और इस बदलाव से अनुमानित 1.5 से 2 लाख छात्र-छात्राएँ प्रभावित होंगे, जिन्होंने परीक्षा योजना अपने विषय संयोजन पर इस विकल्प के आधार पर बनाई थी।  

एडिशनल विषय क्या था और क्यों ज़रूरी था

‘एडिशनल सब्जेक्ट’ का विकल्प उन छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा था जिन्हें कक्षा 12 उत्तीर्ण करने के बाद व्यवसाय बदलने, प्रवेश परीक्षाओं (JEE, NEET, इंजीनियरिंग आदि) में अर्हता प्राप्त करने या अपने शैक्षणिक प्रोफ़ाइल को बेहतर बनाने की ज़रूरत होती थी। उदाहरण के लिए, अगर किसी छात्र ने विज्ञान स्ट्रीम (PCB – Physics, Chemistry, Biology) लिया हो और उसे इंजीनियरिंग रूट के लिए गणित (Maths) की आवश्यकता हो, तो वह प्राइवेट छात्र के रूप में एक साल बाद एडिशनल विषय के रूप में गणित शामिल कर सकता था।  

क्या बदला है अब?

CBSE ने यह निर्णय लिया है कि 2026 बोर्ड परीक्षा के लिए प्राइवेट छात्रों के लिए एडिशनल विषयों का विकल्प समाप्त किया जा रहा है। इसका मतलब है कि वो छात्र जिनके पास इस विकल्प पर योजना थी, अब इसे इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।  

इसके साथ ही बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि एडिशनल विषयों को चुनने के लिए छात्र को दो साल की अवधि के लिए विषय पढ़ना ज़रूरी था। स्कूलों को भी उन विषयों की परीक्षा कराने की अनुमति होनी चाहिए, जिनमें प्रैक्टिकल और इंटर्नल असेसमेंट हो — और स्कूलों के पास शिक्षक, सुविधाएँ व प्रयोगशालाएँ होनी चाहिए।  

छात्रों और अभिभावकों की प्रतिक्रिया

इस निर्णय के बाद छात्रों और अभिभावकों में भारी आक्रोश है। कई छात्र जिन्हें “ड्राप ईयर” लेकर एडिशनल विषय की तैयारी थी, अब अपनी भर्ती-योजनाएँ, कोचिंग, करियर की संभावनाएँ सभी प्रभावित हो गई हैं।  

“मैंने PCB स्ट्रीम से 12वीं पास की है और JEE के लिए गणित जोड़ने की तैयारी कर रहा था, एडिशनल विषय के जरिए, लेकिन अब रास्ता बंद हो गया है,” कहते हैं एक छात्र।  

अभिभावक भी कहते हैं कि यह निर्णय समय रहते सूचना न देने के कारण अनुचित है। कई ऐसे छात्र हैं जिन्होंने इस विकल्प पर भरोसा किया और इसके अनुसार कोचिंग, सामग्री आदि की व्यवस्था कर ली थी। अब वे उलझन में हैं कि आगे क्या करें।  

CBSE की ओर से स्पष्टीकरण

CBSE के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एडिशनल सब्जेक्ट में आंतरिक मूल्यांकन (Internal Assessment) शामिल होता है, जिसका निर्धारण स्कूल-आधारित गतिविधियों, प्रायोगिक कार्य और प्रोजेक्ट्स पर निर्भर है। प्राइवेट उम्मीदवारों के लिए इस तरह की गतिविधियाँ पूरी तरह से सुनिश्चित नहीं की जा सकती थीं। इसलिए बोर्ड ने यह विकल्प समाप्त करने का निर्णय लिया है।  

बोर्ड ने यह भी कहा कि एडिशनल विषयों की पढ़ाई दो वर्ष की होती है। यदि कोई स्कूल आवश्यक संसाधन, प्रयोगशालाएँ या शिक्षक नहीं रखता हो, तो वह विषय वह नहीं दे सकता। साथ ही यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) की दिशा में माना जा रहा है, जिसमें नियमित विद्यालयी शिक्षा और पूर्ण-अवधि अध्ययन पर ज़ोर है।  

प्रभाव और चुनौतियाँ
•छात्रों के करियर विकल्प सीमित होंगे: इंजीनियरिंग, व्यवसाय, प्रबंधन जैसे कोर्सेज़ जिनमें विशेष विषय अनिवार्य होते हैं, वहाँ प्रवेश की बाधाएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
•अर्थ-व्यवस्था और समय की बर्बादी: कई छात्रों ने एक वर्ष बिताया था, कोचिंग ली थी, विषय संयोजन बदला था — अब सब कुछ दूर हो सकता है।
•ड्रोपर छात्र और होम-स्कूलिंग करने वालों के लिए विकल्पों का तंग होना: ये विद्यार्थी विशेष रूप से प्रभावित होंगे।
•शिक्षा की लचीलापन (flexibility) पर सवाल: अचानक नियम बदलने से छात्रों की योजनाएँ प्रभावित हुईं और मानसिक दबाव बढ़ा है।

आगे की मांगें और सुझाव

छात्र समुदाय बोर्ड से अनुरोध कर रहा है कि इस निर्णय को वापस लिया जाए या इस तरह के प्रभावित छात्रों के लिए विशेष प्रावधान लागू किए जाएँ — जैसे कि एनआईओएस (NIOS) जैसे खुले विद्यालय प्रमाणपत्रों को स्वीकार करना या विशेष परीक्षा / पूरक विषय चुनने की व्यवस्था करना।  

कुछ छात्र और अभिभावक भी चाहते हैं कि CBSE समय से पहले बदलावों की सूचना जारी करे, ताकि स्कूल, कोचिंग और छात्र योजना बना सकें।  

निष्कर्ष

CBSE का यह कदम, यद्यपि शैक्षिक मानकों और आंतरिक मूल्यांकन की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने की दिशा में लिया गया है, लेकिन इसने प्राइवेट उम्मीदवारों के लिए एक महत्वपूर्ण व्यवस्था को समाप्त कर दिया है। इस फैसले का समय ऐसी योजनाओं पर भरोसा कर रहे छात्रों के लिए बेहद संवेदनशील है। अगर बोर्ड छात्रों की उम्मीदों और करियर आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इस नीति में संशोधन करता है, तो यह प्रशिक्षिण, प्रवेश परीक्षाएँ और विकास की दिशा में संतुलन बनाए रखने का अवसर है।

THE CG NEWS
Author: THE CG NEWS

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